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सुप्रीम कोर्ट में जजों के चार पद खाली, अगस्त तक छह और जज हो जाएंगे रिटायर

देश की सबसे बड़ी अदालत उच्चतम न्यायालय में आने वाले समय में गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। फिलवक्त उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों के चार पद खाली हैं और इन्हें भरने के लिए उच्चतम न्यायालय के कोलेजियम ने अभी तक कोई सिफारिश केंद्र को नहीं भेजी है। अगले छह महीने में, अगस्त 21, तक चीफ जस्टिस सहित उच्चतम न्यायालय के छह जज रिटायर हो जाएंगे।

इस बीच नए जजों की नियुक्ति के लिए उच्चतम न्यायालय के कोलेजियम की अभी तक बैठक हुई है या नहीं इस पर विवाद है। एक न्यूज़ वेबसाइट का कहना है कि आखिरी बार कोलेजियम की बैठक सितंबर 20 में हुई थी, जबकि राजधानी के एक अंग्रेजी दैनिक का दावा है कि पिछले एक माह में कोलेजियम की कम से कम तीन बैठकें हुईं, लेकिन त्रिपुरा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अकील ए कुरैशी के नाम पर सर्वसम्मति न बन पाने के कारण केंद्र सरकार को कोई नाम नहीं भेजा गया।

उच्चतम न्यायालय में इस वक्त तय संख्या से कम जज हैं। वर्ष 2009 में उच्चतम न्यायालय में 26 जजों की संख्या बढ़ाकर 31 कर दी गई थी। 2019 में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 34 की गई थी, इसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया भी शामिल हैं।

इस वक्त उच्चतम न्यायालय में तीस जज हैं, लेकिन आने वाले छह महीने में उच्चतम न्यायालय से पांच जज रिटायर होने वाले हैं। इनमें से 13 मार्च को जस्टिस इंदु मल्होत्रा, 23 अप्रैल को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बोबडे, 4 जुलाई को जस्टिस अशोक भूषण, 12 अगस्त को जस्टिस आरएफ नरीमन तथा 18 अगस्त 21 को जस्टिस नवीन सिन्हा रिटायर होंगे।

पिछले साल दो सितंबर को जस्टिस अरुण मिश्रा के रिटायर होने के बाद से उच्चतम न्यायालय के कोलेजियम ने अभी तक उच्चतम न्यायालय में नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार से कोई सिफारिश नहीं की है। इसके पहले 19 जुलाई 2020 को जस्टिस आर भानुमति की सेवानिवृत्ति हुई थी। उच्चतम न्यायालय के कोलेजियम में इस समय चीफ जस्टिस एएस बोबडे, जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस एएम खानविल्कर हैं। उच्चतम न्यायालय में किसी जज की आखिरी नियुक्ति करीब 18 महीने पहले 23 सितंबर 2019 को जस्टिस ऋषिकेश रॉय के तौर पर हुई थी।

उच्चतम न्यायालय में पदोन्नति पाने वालों में कर्नाटक उच्च न्यायालय की वरिष्ठ न्यायाधीश बीवी नागरत्न, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा (जिनका मूल हाई कोर्ट मध्य प्रदेश है), इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर (राजस्थान), कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश  टीबी राधाकृष्णन (केरल), गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ (इलाहाबाद), त्रिपुरा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अकील ए कुरैशी (गुजरात), दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल (गुजरात) और पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल के नाम लिए जा रहे हैं। पहले इनमें जस्टिस एपी शाही और जस्टिस गीता मित्तल का भी नाम था, पर ये अवकाशग्रहण कर चुके हैं।

जहां तक जस्टिस बीवी नागरत्न की पदोन्नति का प्रश्न है तो वरिष्ठता और कर्नाटक हाई कोर्ट के तीन प्रतिनिधि का उच्चतम न्यायालय में होना उनके खिलाफ जा सकता है। कर्नाटक उच्च न्यायालय से जस्टिस एमएम शांतनगौदर, एस अब्दुल नज़ीर और एएस बोपन्ना उच्चतम न्यायालय में हैं और इनमें से कोई भी जनवरी 2023 से पहले सेवानिवृत्त होने वाला नहीं है।

इन नामों में से जस्टिस झा का प्रमोशन लगभग निश्चित है, क्योंकि दो सितंबर को जस्टिस अरुण मिश्रा के सेवानिवृत्त होने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होगा। पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल, जिनका मूल हाई कोर्ट हिमाचल प्रदेश है, के नाम पर भी चर्चा की जा रही है, क्योंकि उस राज्य का अब जस्टिस दीपक गुप्ता की सेवानिवृत्ति के बाद प्रतिनिधित्व नहीं है। जस्टिस करोल अखिल भारतीय वरिष्ठता में जस्टिस नागरत्न से भी वरिष्ठ हैं।

वर्तमान में, चीफ जस्टिस बोबडे सहित उच्चतम न्यायालय के चार न्यायाधीशों का मूल उच्च न्यायालय बॉम्बे हाई कोर्ट है, जबकि दिल्ली और देश के सबसे बड़े उच्च न्यायालय इलाहाबाद हाई कोर्ट के तीन-तीन न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय में हैं। मद्रास और कलकत्ता के दो-दो न्यायाधीश हैं। सुप्रीम कोर्ट में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के एक-एक प्रतिनिधि हैं, जबकि उड़ीसा, झारखंड और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के कोई प्रतिनिधि नहीं हैं। इसके आलावा सिख समुदाय का भी कोई न्यायाधीश उच्चतम न्यायालय में नहीं है, न ही निकट भविष्य में इस समुदाय से किसी के उच्चतम न्यायालय में जज बनने की संभावना है।

गुजरात हाई कोर्ट के सिर्फ एक प्रतिनिधि हैं, जो दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पटेल की संभावनाओं को बढ़ाता है। जहां तक जस्टिस अकील कुरैशी का मामला है तो पहले ही केंद्र सरकार उनके मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस बनने की सिफारिश पर अड़ंगा लगा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के लिए जस्टिस कुरैशी का नाम प्रस्तावित किया था। इस नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार ने कॉलजियम से निवेदन किया था कि वह अपने निर्णय पर पुन: विचार करे।

इसके बाद कॉलेजियम ने जस्टिस कुरैशी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जगह त्रिपुरा के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव दिया, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया और जस्टिस कुरैशी त्रिपुरा की चीफ जस्टिस बना दिए गए। दरअसल इसके पीछे माना जाता है कि वर्ष 2010 में जस्टिस कुरैशी ने वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह को सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा था, इसलिए उच्चतम न्यायालय के कालेजियम द्वारा उनके नाम की सिफ़ारिश की संभावना बहुत कम मानी जा रही है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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This post was last modified on February 13, 2021 11:58 am

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