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Wednesday, September 29, 2021

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पेगासस मुद्दे पर गृहमंत्री प्रधानमंत्री की मौजदूगी में सदन में जवाब दें: मल्लिकार्जुन खड़गे

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राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि- “सरकार को संसद में गतिरोध तोड़ने के लिए सामने आना चाहिए, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं है। हमारी मांग है कि सबसे पहले पेगासस स्पाइवेयर फोन हैक मामले पर संसद में चर्चा हो और गृहमंत्री जवाब दें उस दौरान प्रधानमंत्री भी सदन में मौजूद रहें।

उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली प्रगतिशील गठबंधन सरकार की नजीर देते हुये कहा कि – “यूपीए के कार्यकाल के दौरान तीन बार नियम 267 के तहत महंगाई और दूसरे मसलों पर चर्चा हुयी थी। 4 अगस्त 2010 में इन्फ्लेशन पर चर्चा हुई। फिर 07 दिसम्बर 2012 में रिटेल क्षेत्र में एफडीआई पर चर्चा हुई और 22 अप्रैल 2013 में किसानों के आत्महत्या के मसले पर चर्चा हुई थी।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि आज फिर सदन में पेगासस मुद्दे पर हम लोग डिबेट चाह रहे थे, लेकिन सरकार उस पर डिबेट नहीं करना चाहती थी, जिससे सदन स्थगित हो गया। हम पेगासस इशू इसलिए महत्वपूर्ण मानते हैं क्योंकि इसमें सबकी जासूसी हो रही है।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि आज सुबह हमें न्यूज मिली और पता चला कि इजरायल गवर्मेंट ने एनएसओ कंपनी पर छापा मारा। छापा मारे जाने के बाद एक बयान आया एनएसओ की तरफ से कि जो कोई लोग, जो कोई देश ने इस कंपनी की ओर से मुहैया कराए गए पेगासस के इंस्ट्रूमेंट का गलत इस्तेमाल किया है, उन सभी को स्थगित किया जाए, ये उन्होंने आदेश दिया है।

उन्होंने आगे कहा कि – “तो इसका मतलब ये है कि जासूसी चल रही थी, हर देश में चल रही थी और हमारे देश में तो खासकर ये 2019 से अब तक चल रही है। इसका एक ही स्पष्ट उदाहरण मैं आपके सामने देना चाहता हूं – नवंबर में जब राज्यसभा में हमारे वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह जी ने मामला उठाया था। उस वक्त के आईटी मिनिस्टर ने ये कहा कि ये सब झूठ है, ऐसा कुछ नहीं है। फिर बाद में उनके दबाव डालने के बाद उन्होंने कहा कि 121 लोगों के नाम आए हैं। वो समय आने पर हम बताएंगे। तो इसका मतलब है कि तबसे जासूसी चल रही है, खासकर के जो विपक्षी पार्टी के नेता लोग हैं, प्रेस के नेता हैं या प्रेस के एडिटर, रिपोर्टर, जर्नलिस्ट हैं और उसी ढंग से प्राइवेट लोगों के ऊपर भी नजर रखकर वो अपनी जासूसी कर रहे हैं। और ऐसा कहीं नहीं हुआ, किसी देश में ऐसा नहीं होता कि अपने देश में जासूसी करना है। किसी और के देश के लोगों को अपनी जासूसी करने की वो पॉवर नहीं देते। तो यहाँ पर तो अपना काम इजरायली कंपनी एनएसओ के पेगासस को उन्होंने दिया। तो क्या ये जानकारी छुप सकती है? अगर आप दूसरे देश के लोगों को यहाँ की जासूसी सौंप देंगे, तो देश क्या सुरक्षित रहेगा ?

उन्होंने आगे कहा कि इसलिए हम चाहते हैं कि लोकसभा और राज्यसभा में इस पर बातचीत हो, सब बाहर आए। और जैसा कि जर्मनी ने और फ्रांस ने जांच बैठायी है और खासकर जो जांच करके दिखाई कि वहाँ के जर्नलिस्ट की जो उन्होंने जासूसी की थी, वो बाहर निकल कर आई। और एक जर्नलिस्ट का भी आया है। तो इससे ये साफ जाहिर है कि जासूसी करने वाली जो भी कंपनी हैं, इन्होंने इंगेज्ड करके यहाँ के लोगों को, यहाँ की जो भी प्राइवेसी है, उनकी स्वतंत्रता है और डेमोक्रेसी में खासकर इसको डिस्ट्रोय करने के लिए ये लोग काम कर रहे हैं। तो इसलिए हम ये चाहते हैं कि इसका फुल डिस्कशन हाउस में हो। और बार-बार हम पर इल्जाम लगा रहे हैं कि हाउस डिसरप्शन कर रहे हैं, काम होने नहीं दे रहे हैं, डिस्कशन होने नहीं दे रहे हैं और बिल पास होने नहीं दे रहे हैं। ये सब सत्य से दूर हैं। हम डिस्कशन के लिए तैयार हैं। हमने लाख कोशिश की है, तब भी वो मानने वाले नहीं हैं, क्योंकि इसमें उनका झूठ पकड़ा गया है।

एक प्रश्न पर कि सरकार कह रही है कि वो चर्चा के लिए तैयार है, श्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पेगासस पर चर्चा कर लीजिए, हम भी चर्चा करने के लिए तैयार हैं। आज सुप्रीम कोर्ट ने भी एन राम के केस में उन्होंने उसको सहमति दी कि नेक्स्ट वीक में उसको लेंगे।

गतिरोध लोकतंत्र का हिस्सा है

विपक्षी दलों द्वारा लगातार सदन की कार्रवाई में गतिरोध डालने के आरोप पर उन्होंने कहा कि- “अरे इतने सारे देशों के अंदर, देश के बाहर के लोग पूछ रहे हैं पेगासस के बारे में, वो क्यों नहीं हो रहा ? तो हमारा यही मुद्दा है कि डिसरप्शन आज भी कर रहे हैं। ये तो पहले जेटली साहब, वही आदत डाले थे, सुषमा स्वराज भी डाले थे और उन्होंने यही कहा, अरे ये डिसरप्शन करना भी तो डेमोक्रेसी का हिस्सा है। तो जब आप कर सकते हैं और हम देश के हित में, लोगों के हित में, आजादी के लिए और डेमोक्रेसी के लिए हम जब ये कर रहे हैं, पूछ रहे हैं आपसे, तो आप हमको इस ढंग से ब्लेम कर रहे हैं कि हाउस को चलने नहीं दे रहे, भाई, चलाओ, पहले ये चलाओ।

कितनी बार सुझाव दें किसान

आगे उन्होंने किसानों के मुद्दे पर कहा कि – “किसानों का मुद्दा भी बहुत बड़ा अच्छा मुद्दा है। वो लोग पीड़ित हो रहे हैं, बॉर्डर पर बैठे हुए हैं, उनके बारे में इनके पास कोई भी सुझाव नहीं हैं। वो उल्टा कहते हैं कि सुझाव तो आने दो। अरे कितनी बार सुझाव देना ? जब बिल आया, सुझाव दिए। जब डिवीजन पूछा तो नहीं किया। फिर उसके बाद में भी सभी प्रेस कांफ्रेंस में ये बात रखी, कॉलिंग अटेंशन को भी ये लोग दिए जिला स्तर पर उठाया फार्मर का मुद्दा है, इंफ्लेशन का मुद्दा है, जो कॉमन मैन को अफेक्ट कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि – “हम जानते हैं, पेट्रोल और फ्यूल का इशू है। राफेल का करप्शन मामला है, बहुत सी चीजें हैं, बहुत मुद्दे हैं, लेकिन हम एक-एक मुद्दे पर चर्चा करना चाहते हैं। पहला, सभी पार्टी मिलकर, आज भी मेरे ऑफिस में सभी पार्टी के नेता लोग आए थे और सभी ने एक आवाज से यही कहा कि पहले पेगासस मुद्दा हमने उठाया है, उसका डिस्कशन जारी रखें, डिस्कशन के बाद दूसरी चीजें फिर हम लेंगे, ये सबका कहना है। इसलिए मैं ये बताना चाहता था कि आज एक होकर इस विषय पर हम लड़ रहे हैं, हम सभी का साथ पूछने में हिचकिचाते नहीं, सभी को हम इसमें इंवॉल्व करना चाहते हैं।

पेगासस मुद्दे पर विपक्षी दलों की बैठक

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में कांग्रेस और समान विचार वाले राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक हुई। बैठक में विभिन्न दलों के दोनों सदनों के नेता और सांसद मौजूद रहे। इस बैठक में पेगासस जासूसी मामला, किसान आंदोलन और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में खड़गे के अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और आनंद शर्मा, द्रमुक के टीआर बालू एवं तिरुची शिवा, शिवसेना के संजय राउत, तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदु शेखर रॉय, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वंदना चव्हाण, नेशनल कॉन्फ्रेंस के हसनैन मसूदी और कई अन्य राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए।

वहीं दूसरी ओर अकाली दल और बसपा के सांसदों ने मानसून सत्र के नौवे दिन संसद भवन के गेट नंबर 4 के बाहर किसान बिल के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया। उन्‍होंने कृषि कानूनों को वापस लेने की आवाज़ बुलंद की। अकाली दल इसी मुद्दे पर शनिवार को राष्ट्रपति से मिलेगा। उन्‍होंने कहा कि अगर सरकार ने किसानों की अनदेखी की तो पश्चिम बंगाल जैसा हाल होगा।

8वें दिन भी नहीं चले दोनों सदन

पेगासस जासूसी मामले को लेकर संसद के मॉनसून सत्र में गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा। संसद सत्र को शुरू हुए आठ दिन हो चुके हैं लेकिन दोनों सदनों में लगातार कार्यवाही टालने की नौबत आ रही है। आज 30 जुलाई शुक्रवार को भी गतिरोध के चलते लोकसभा और राज्‍यसभा की भी कार्यवाही सोमवार 11 बजे तक स्‍थगित करनी पड़ी।

आज सुबह कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों ने पेगासस और कृषि क़ानून के मुद्दे पर नारेबाजी शुरू की। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गतिरोध के बीच ही आधे घंटे तक प्रश्नकाल की कार्यवाही को चलाया। फिर सदन की कार्यवाही को क़रीब 11:30 पर दोपहर 12 बजे तक के लिये स्थगित कर दिया। प्रश्नकाल के दौरान गतिरोध के बीच ही महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, आयुष मंत्री सर्वानंद सोनोवाल, वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने अपने-अपने मंत्रालयों से जुड़े पूरक प्रश्नों के उत्तर दिये।

आज सुबह 11 बजे राज्‍यसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो सभापति वेंकैया नायडू ने कहा – “मेरे संज्ञान में लाया गया है कि जहां मंत्री बैठे हैं, वहां कुछ विपक्षी सांसद पोस्‍टर के साथ जाकर सीटियां बजा रहे हैं। मैं चिंतित हूं, आप लोग आखिर सदन को कितने निचले स्‍तर पर ले जा रहे हैं।”

संसदीय कार्य मंत्री ने पेगासस और किसान आंदोलन को बताया ‘नॉन इशू’

लोकसभा में कार्यवाही शुरू होते ही संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हुये कहा है कि – “विपक्ष बिना वजह नॉन इशू को इशू बना रहा है। इसको लेकर पहले ही आईटी मिनिस्टर बोल चुके हैं। सरकार चर्चा को तैयार है जो बीएसी में तय हुआ है। कार्यवाही लगातार बाधित करके सांसदों का हक छीना जा रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। सदन को चलने नहीं दिया जा रहा जबकि सरकार जनता से जुड़े मुद्दे पर बात को तैयार।

संसद में विपक्ष के गतिरोध पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि- “विपक्षी दल हंगामा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने हमेशा कहा है कि चाहे किसानों का विषय हो या कोई भी और विषय, सरकार संसद में चर्चा के लिए तैयार। सरकार चर्चा चाहती है लेकिन विपक्ष चर्चा के लिए तैयार नहीं है। विपक्ष को चर्चा के लिए तैयार होना चाहिए।

बीमा संशोधन विधेयक पेश

गतिरोध के बीच ही सदन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘साधारण बीमा कारोबार (राष्ट्रीयकरण) संशोधन विधेयक, 2021′ पेश किया। वन एवं पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एवं संलग्न क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिये आयोग विधेयक, 2021′ पेश किया।

फर्जी 2G स्कैम को लेकर भाजपा का विरोध जायज और पेगासस को लेकर विपक्षी दलों का गतिरोध नाज़ायज़

पेगासस मुद्दे पर लेकर गतिरोध को लेकर तृणमूल कांग्रेस की सांसद शताब्दी राय ने कहा है कि – “सरकार हम लोगों पर क्यों आरोप लगा रही है। जो बहस विपक्ष मांग रही है सरकार उसको क्यों नहीं मांग रही है। सरकार अगर सदन चलाना चाहती है तो बहस करा ले। शताब्‍दी ने कहा कि आपको याद होगा पहले बीजेपी ने 2जी स्‍कैम में भी पूरा सेशन सदन नहीं चलने दिया था। उनका कारण था और आज विपक्ष का भी कारण हैं। अगर पेगासस को लेकर हम लोग बोल रहे है उनके पास प्रूफ है कि कुछ नहीं किया है तो आकर बोले अगर हमारा मुद्दा सही नहीं है तो ये भी आकर बताए हम लोगों का आकर जवाब दें। मुद्दा खत्म।

(जनचौक के विशेष संवादाता सुशील मानव की रिपोर्ट )

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