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छात्र-छात्राओं का आक्रोश, महिला अपराधों पर सरकार मौन

तेलंगाना और झारखंड में हुई सामूहिक बलात्कार और हत्या जैसी दरिंदगी से पूरा देश सकते में है। देश भर में इन घटनाओं के खिलाफ आक्रोश देखा जा रहा है। समाज का हर तबका विरोध मार्च निकाल कर इस घिनौनी हरकत पर आक्रोश व्यक्त कर रहा है।

एक दिसंबर 2019 को बीएचयू वाराणसी की छात्राओं ने देश में बढ़ रही बलात्कार की घटनाओं और महिला हिंसा के खिलाफ आक्रोश मार्च निकाल कर हैदराबाद की प्रियंका रेड्डी को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही रांची की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की आदिवासी छात्रा से गैंगरेप की तीखी भर्त्सना की गई।

महिला महाविद्यालय से निकले आक्रोश मार्च में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने शिरकत की। सबने एक स्वर में रेप संस्कृति के खिलाफ गुस्सा निकाला और इसको जड़ से खत्म करने का प्रण लिया। सबने कहा कि हमारी पढ़ाई का कोई मतलब नहीं है, जब तक देश में एक भी महिला या लड़की असुरक्षित है। छात्राओं ने कहा कि किसी भी सरकार ने महिला सुरक्षा पर गंभीर पहल नहीं की। रेप जैसी सामाजिक बुराई को मिटाने के लिए हम सभी को आगे आना होगा, तभी हम एक बेहतर सुरक्षित समाज का निर्माण कर पाएंगे।

महिला विरोधी गालियां जो मां-बहन या किसी भी स्त्री के नाम से दी जाती हैं, के खिलाफ बोलते हुए सबने कहा कि हम सब मिलकर महिला विरोधी गालियों को खत्म करने की हर संभव कोशिश करेंगे। आक्रोश मार्च कैंपस में लौटकर एक सभा में बदल गया। जहां आयुषी, उर्वशी, अंशुल, राधिका, मुदिता आदि ने अपनी बात रखी और क्रांतिकारी गीत गाए।

आकांक्षा ने मार्च और सभा का संचालन किया। सभी ने हैदराबाद और रांची के साथ पूरे देश भर में हो रही महिला हिंसा की निंदा की और प्रियंका रेड्डी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

‘महिला मुक्ति-सबकी मुक्ति सबकी मुक्ति जिंदाबाद’, ‘उन्नाव रांची हैदराबाद नहीं सहेगा हिंदुस्तान’, ‘रेप कल्चर मुर्दाबाद’ आदि नारे लगाएं गए।

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30 नवंबर की शाम पांच बजे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन से आज़ाद पार्क तक छात्र-छात्राओं ने आक्रोश मार्च निकाला और सभा की। तेलंगाना की डॉ. प्रियंका रेड्डी के साथ सामूहिक बलात्कार-हत्या और झारखंड की एक आदिवासी युवती के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना को लेकर उन्होंने आक्रोश व्यक्त किया। इंक़लाबी छात्र मोर्चा ने भी इस जुलूस और सभा में हिस्सा लिया। सभा के बाद दो मिनट का मौन रखकर प्रियंका रेड्डी को श्रद्धांजलि दी गई।

सभा में एक स्वर में सभी वक्ताओं ने बलात्कारियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की बात की। ये भी कहा गया कि बलात्कार की संस्कृति और सोच हमारे समाज में बहुत ही गहराई से जड़ जमाए बैठी है। सिर्फ बलात्कारियों को फांसी देने से ये घटनाएं नहीं रुकने वाली हैं। इसके लिए हमें पूरे समाज में व्याप्त सामंती, साम्राज्यवादी और पितृसत्तात्मक सोच, संस्कृति और व्यवस्था की जड़ों पर हमला करना होगा।

छात्र-छात्राओं ने कहा कि जब तक समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं और पुरुषों के बीच बराबरी व्याप्त नहीं होगी, समाज से यह कुरीति दूर नहीं होगी। महिला को उपभोग की वस्तु मात्र समझने वाली पुरुषवादी सोच, फिल्मों, साहित्य आदि पर रोक लगाकर एक बराबरी पर आधारित संस्कृति और अर्थव्यवस्था का निर्माण करना होगा। विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों ने जुलूस और सभा में हिस्सा लिया।

(जनचौक संवाददाता विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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