Wednesday, December 7, 2022

उत्तराखंड: सत्ता संरक्षित दरिंदों ने ले ली मासूम अंकिता की जान

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देहरादून। जेब में नोटों की खनक हो और साथ में सत्ता की हनक हो तो एक 19 वर्ष की युवती के साथ दरिंदगी और फिर उसकी हत्या कर देना कोई बड़ी बात नहीं है। और यदि युवती गरीब मजबूर परिवार की हो तो ऐसा करना और भी आसान हो जाता है। उत्तराखंड में 19 वर्ष की अंकिता भंडारी के साथ यही हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता और उत्तराखंड सरकार में दर्जाधारी रहे विनोद आर्य के बिगड़ैल बेटे पुलकित ने अपने रिसोर्ट में काम करने वाली अंकिता की बेरहमी से हत्या कर दी। अब तक सामने आई पुलिस की थ्योरी कहती है कि पुलकित आर्य अंकिता को एक्स्ट्रा इनकम के नाम पर देह व्यापार के धंधे में धकेलना चाहता था, लेकिन अंकिता ने विरोध किया। यह बात अंकिता ने व्हाट्सएप के माध्यम से अपने एक दोस्त को भी बताई। अंकिता के इंकार से सत्ताधारी की बिगड़ैल संतान पुलकित के अहम को ठेस लगी और आखिरकार उसने अंकिता को ठिकाने लगा दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट कहती है कि अंकिता पर धारदार हथियार से हमला किया गया, हालांकि उसकी मौत का कारण पानी में डूबना बताया गया है। इस घटनाक्रम पर आने से पहले एक बार हम अंकिता के परिवार और परिवार की स्थिति पर नजर डालेंगे। क्योंकि पहाड़ में लगभग 90 प्रतिशत परिवार इसी स्थिति में रह रहे हैं और लगभग हर परिवार के पास बेटियां हैं।

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देहरादून में घटना के खिलाफ प्रदर्शन।

अंकिता भंडारी पौड़ी जिले के श्रीकोट गांव की रहने वाली थी। पढ़ने में होशियार इस बच्ची को माता पिता ने किसी तरह पौड़ी के एक अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाया। कोरोना काल में अंकिता के पिता की नौकरी चली गई। इसके बावजूद उन्होंने किसी तरह अंकिता को 12वीं पास करवाया। इसके बाद होटल मैनेजमेंट का कोर्स में करवाया गया। इस बीच अंकिता की मां को गांव की आंगनबाड़ी में नौकरी मिली तो किसी तरह घर का खर्चा चलता रहा। होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने के बाद 19 वर्ष की अंकिता ने मां-बाप का सहारा बनने का प्रयास शुरू किया। अपने एक दोस्त के माध्यम से उसे पौड़ी जिले में यमकेश्वर ब्लॉक के भोगपुर गांव में चलाए जाने वाले वनन्तरा रिसॉर्ट का पता मिला। अंकिता ने अप्लाई किया तो 10000 रुपये महीना वेतन पर उसे रिसेप्शनिस्ट की नौकरी मिल गई। मौत से लगभग 25 दिन पहले 23 अगस्त 2022 को अंकिता को उसके पिता इस रिसॉर्ट में छोड़कर घर लौटे थे।

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राज्य के पुलिस मुखिया के साथ विनोद आर्य।

अब तक हुई पुलिस जांच के अनुसार यह रेस्टोरेंट भाजपा नेता और हरिद्वार के रहने वाले विनोद आर्य के पुत्र पुलकित आर्य का है। विनोद आर्य अपने नाम के आगे राज्य मंत्री उत्तराखंड लिखते रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि वे कभी उत्तराखंड में राज्य मंत्री नहीं रहे। भाजपा सरकार ने उन्हें दर्जाधारी जरूर बनाया था। यानी कि विनोद आर्य का खुद का राजनीतिक कैरियर भी झूठ की बुनियाद पर टिका हुआ है। विनोद आर्य के राजनीतिक रसूख का पता इस बात से चलता है कि इस घटना के बाद से उनके बारे में जो जानकारियां सामने आ रही हैं, उनमें उनकी वे तमाम फोटो भी शामिल हैं, जो उन्होंने बड़े नेताओं और नौकरशाहों के साथ खिंचवाई हैं। मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार के अलावा कई अन्य बड़े लोगों के साथ भी विनोद आर्य के फोटो हैं। सत्ता में उनके दखल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने बड़े बेटे अंकित आर्य को अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग का उपाध्यक्ष बनवा रखा था। हालांकि इस घटना के बाद भाजपा ने विनोद आर्य और अंकित आर्य को सरकार और पार्टी में सभी पदों से हटा दिया है और उन्हें मिलने वाले सभी सरकारी सुविधाओं पर रोक लगा दी है।

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आरएसएस से जुड़े हैं आरोपी के पिता विनोद आर्य।

विनोद आर्य पद का दुरुपयोग लगातार करते रहे हैं। अंकिता हत्याकांड में आरोपी पुलकित पहले भी लगातार कानून का उल्लंघन करता रहा है। कोविड लॉकडाउन में जब देश भर में सब कुछ बंद था, सभी लोग अपने घरों में कैद थे, तो पुलकित आर्य उत्तर प्रदेश के अपने एक बाहुबली मित्र के साथ चमोली जिले में जोशीमठ से आगे उरगम गांव पहुंच गया था। साफ है कि वह अपने पिता के रसूख के कारण ही तमाम पुलिस बैरियर पार करके वहां पहुंचा था। पुलिस ने बेशक उसके पिता के रसूखों को देखते हुए उसे जाने दिया हो, लेकिन उरगम गांव में लोगों ने उसे घेर लिया और पुलिस के हवाले किया गया। लेकिन, विनोद आर्य ने अपने राजनीतिक संपर्कों का फायदा उठाकर पुलकित को छुड़ा लिया। 2016 में आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय की बीएएमएस की परीक्षा में उसने अपनी जगह किसी और को परीक्षा देने भेज दिया था।

दर्ज नहीं की रिपोर्ट

अंकिता 18 सितंबर को लापता हो गई थी। उसके पिता ने राजस्व पुलिस में शिकायत की, लेकिन पटवारी ने उन्हें यह कहकर भगा दिया कि लड़की किसी के साथ भाग गई होगी। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के 60 प्रतिशत क्षेत्र में आज भी राजस्व पुलिस की व्यवस्था है। यह व्यवस्था अंग्रेजों ने शुरू की थी। अंग्रेजों ने पुलिस पर खर्च करने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस के अधिकार पटवारियों को दे दिए थे, जो आज भी उसी तरह से चल रहे हैं। जिस रिसॉर्ट में अंकिता काम करती थीए वह भी राजस्व पुलिस क्षेत्र में है। यहां खास बात यह है कि पटवारी ने अंकिता के पिता की शिकायत बेशक दर्ज न की हो, लेकिन रिजॉर्ट के मालिक की यह शिकायत दर्ज कर दी कि उनके रिजॉर्ट में काम करने वाली अंकिता उनका मोबाइल लेकर भाग गई है। अंकिता की मौत भी शायद कई दूसरी कई बच्चियों की मौतों की तरह ही गुमनाम रह जाती, लेकिन अपने जम्मू के एक दोस्त को भेजे गए उसके व्हाट्सएप संदेश सोशल मीडिया पर आ गए। इन संदेशों में अंकिता ने रिजॉर्ट मालिक पुलकित द्वारा उसके साथ की जा रही गंदी हरकतों के बारे में लिखा था। उसने यह भी लिखा था कि पुलकित को लगता है कि वह कुछ पैसे के लिए बिक जाएगी, लेकिन उसने उसका पूरा विरोध किया। अपने इसी दोस्त को किए गए एक फोन की रिकॉर्डिंग भी सोशल मीडिया पर आई है, जिसमें अंकिता रोते हुए यह कहते हुए सुनाई दे रही है क्या इन लोगों ने उसे रां.. समझ रखा है?

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छात्र संगठन भी उतरे अंकिता को न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर।

अंकिता के यह संदेश सोशल मीडिया पर आने के बाद कई लोग सक्रिय हुए। खासकर यमकेश्वर क्षेत्र के दो पत्रकार अजय रावत और आशुतोष नेगी लगातार इस मामले में कवरेज करते रहे और अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जानकरियां देते रहे। यमकेश्वर क्षेत्र के संजय सिलवार भी लगातार सक्रिय रहे। उत्तराखंड क्रांति दल की भी इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका रही। 5 दिन बाद भी जब अंकिता की गुमशुदगी के मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो यमकेश्वर क्षेत्र के साथ ही कई जगह धरने प्रदर्शन का दौर शुरू हुआ। भारी जन दबाव को देखते हुए आखिरकार इस मामले को राजस्व पुलिस से हटाकर रेगुलर पुलिस को सौंप दिया गया और लक्ष्मण झूला पुलिस को जांच सौंपी गई।

जांच लक्ष्मण झूला पुलिस को मिलते ही 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें रिजॉर्ट का मालिक पुलकित आर्य और उसके दो दोस्त शामिल हैं। लेकिन, यहां भी शुरुआती दौर से ही गोलमाल करने का प्रयास किया गया। उत्तराखंड पुलिस की ओर से इन गिरफ्तारियों के बाद जारी किए गए बयान में कहा गया कि पुलकित और उसके दोस्तों के बीच अंकिता को लेकर विवाद हुआ था और इसी दौरान अंकिता को चीला बैराज में धक्का दे दिया गया। इस तरह इसे गैर इरादतन हत्या का मामला बनाने का भरपूर प्रयास किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि अंकिता पर धारदार हथियारों से हमला किया गया, लेकिन उसकी मौत का कारण पानी में डूबना बताया गया है।

कई सवालों के जवाब नहीं मिल रहे

अंकिता भंडारी के लापता होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर लगातार उसे ढूंढने का दबाव बढ़ रहा था। कुछ जगहों पर धरने प्रदर्शन भी शुरू हो गए थे। इसी दबाव में आकर यह जांच रेगुलर पुलिस को सौंपी गई और 3 लोग गिरफ्तार भी हुए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई। पुलिस की तरफ से यह मामला अब सुलझा लिया गया है। लेकिन, उत्तराखंड का जनमानस इतनी सहजता से इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। अंकिता की मौत के मामले में कई सवाल उठ रहे हैं, जिनके उत्तर नहीं दिए जा रहे हैं। पुलिस की थ्योरी कहती है कि अंकिता को 5 दिन पहले चीला बैराज में फेंका गया था। लेकिन, ऋषिकेश एम्स में अंकिता के शव को देखने वालों का कहना है कि उसे शव बरामद होने से मात्र कुछ घंटे पहले ही बैराज में फेंका गया था। आरोप है कि 5 दिनों तक उसके साथ कई तरह की दरिंदगी की गई।

इस मामले में लगातार जुड़े और पुलिस, आरएसएस व भाजपा की किरकिरी बने एक्टिविस्ट संजय सिलवार कई सवाल उठाते हैं। उनका कहना है कि 24 सितंबर को अंकिता का शव बरामद होने की सूचना मिलने के बाद उनके कुछ साथी चीला बैराज पहुंचे। पुलिस अंकिता के पिता और भाई को लेकर वहां गई थी। उन्हें किसी से नहीं मिलने दिया गया। शव लाकर एम्स ऋषिकेश की मोर्चरी में रखा गया। कुछ देर बाद जब वे मोर्चरी पहुंचे तो भाजपा विधायक रेनू बिष्ट मोर्चरी में मौजूद थीं। संजय सवाल उठाते हैं कि रेनू बिष्ट वहां क्या कर रही थी? वहां मौजूद लोगों ने शव को देखने की इजाजत मांगी, लेकिन इजाजत नहीं मिली। काफी शोर-शराबा करने के बाद सिर्फ दो महिलाओं को शव देखने की इजाजत दी गई।

शव को देखने वाली दो महिलाओं ने जो कुछ बताया वह वास्तव में कई तरह के सवाल पैदा करता है। बताया गया कि शव फूला हुआ नहीं था। 5 दिन तक शव बैराज में पड़ा रहा हो और फिर भी फूला हुआ न हो, यह एक बड़ा सवाल है। शव देखने वाली महिलाओं ने यह भी बताया कि शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे। एक दांत टूटा हुआ था। सबसे खास बात यह है कि शव के किसी भी हिस्से को मछलियों ने नहीं खाया था, जबकि किसी भी शव के गंगा नदी में आते ही सबसे पहले उस पर मछलियां झपटती हैं।

इस बीच कई और भी रहस्यमई घटनाएं हुईं, जो बताती हैं कि पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से आरएसएस कार्यकर्ता विनोद आर्य और भाजपा नेता आरोपी पुलकित के पिता विनोद आर्य के पिता के दबाव में काम कर रहा है। पुलकित आर्य की गिरफ्तारी के बाद उसके रिसोर्ट पर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया। लोग रिजॉर्ट पर बुल्डोजर चलाने की मांग कर रहे थे। हालांकि इस मांग को ज्यादातर लोग जायज नहीं मानते, लेकिन अत्यधिक आक्रोश की स्थिति में अक्सर लोग इस तरह की मांग करते हैं। इस मामले में एक रहस्यमय मोड़ तब आया, जब 23 सितम्बर को दिन में प्रशासन बुल्डोजर न चलाने की बात करता रहा, लेकिन 24 सितंबर तड़के 3 बजे बुल्डोजर भेज दिया गया। बुल्डोजर से रिजॉर्ट का गेट और कुछ शीशे तोड़ने के वीडियो बाकायदा प्रशासन ने जारी किये। इसके बाद बुल्डोजर लौट आया। लेकिन, दोपहर बाद अचानक रिजॉर्ट के एक हिस्से में आग लगने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए। कहा गया कि गुस्साए लोगों ने रिजॉर्ट में आग लगाई है। इस आग को लेकर भी कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। मसलन जब घटना के बाद पूरा रिजॉर्ट प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है तो फिर वे कौन नाराज लोग थे जो आग लगाने रिजॉर्ट तक पहुंच गए? पुलिस ने इन लोगों को वहां जाने और आग लगाने से रोका क्यों नहीं? आरोप लगाया गया है कि सबूतों को मिटाने के लिए यह आग लगाई गई है।

इस बीच पौड़ी पुलिस की ओर से एक अजीबोगरीब बयान भी जारी किया गया है। बयान में कहा गया है कि बुल्डोजर चलाकर सबूत मिटाए जाने की आशंका निराधार है। क्योंकि, पुलिस पहले ही रिसोर्ट से सभी सबूत और फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्रित कर चुकी थी। हालांकि कानून के जानकारों का कहना है कि जांच और मुकदमे के दौरान कई बार घटनास्थल का निरीक्षण करके सबूत जुटाने के प्रयास करने की जरूरत पड़ सकती है।

इस बीच अंकिता के मामले को लेकर राज्य भर में कई जगह धरने-प्रदर्शन हुए हैं। देहरादून में उत्तराखंड महिला मंच के आह्वान पर दर्जनभर संगठनों के सैकड़ों लोगों ने गांधी पार्क के बाहर प्रदर्शन किया। उधर रामनगर और अल्मोड़ा में भी प्रदर्शन किया गया। चमोली जिले के घाट और सुदूरवर्ती गांव कुलसारी में भी लोगों ने हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उत्तराखंड के लोग पुलकित आर्य के पिता भाजपा नेता विनोद आर्य, पुलकित के भाई अंकित आर्य के साथ ही उस पटवारी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे हैं, जिसने अंकिता के पिता की शिकायत दर्ज करने से इंकार कर दिया था। राज्य भर में धरने प्रदर्शनों का दौर लगातार जारी रहने की संभावना है। कई संगठनों ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। लोग उस व्यक्ति के बारे में भी खुलासा करने की मांग कर रहे हैं जिसके सामने अंकिता को परोसने का दबाव बनाया जा रहा था। आशंका जताई जा रही है कि वह कोई सफेदपोश हो सकता है, जिसका नाम छुपाया जा रहा है और इसी उद्देश्य से कभी बुल्डोजर चलाकर और कभी आग लगाकर सबूत नष्ट किए जा रहे हैं।

(देहरादून से वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोचन भट्ट की रिपोर्ट।)

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