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Categories: बीच बहस

झारखंड:मनरेगा योजना बनी फर्जी मजदूरों और प्राक्कलन घोटाले का केन्द्र

झारखंड के नरेगा सहायता केंद्र मनिका की टीम द्वारा मनरेगा के कार्यों पर एक सर्वे में मनरेगा योजना में फर्जी मजदूरों और प्राक्कलन के घोटाले का एक बड़ा पर्दाफाश हुआ है। मामले में प्रख्यात अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज की मांग के बाद प्रशासन ने जांच के भी आदेश दे दिए हैं।

बता दें कि झारखंड के लातेहार जिला अंतर्गत मनिका प्रखंड प्रशासनिक महकमे की नाक तले भदई बथान स्कूल के पूर्व नदी के उस पार टोंगरी के एक वर्ग किलोमीटर में इन दिनों आधे दर्जन से ज्यादा डोभा निर्माणाधीन हैं। इसी तरह मनिका पंचायत के मनिका ग्राम में मनरेगा एमआईएस (मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) रिकार्ड के अनुसार 37 डोभा निर्माण योजनाओं पर कार्य संचालित होना दिखाया जा रहा है। 80X80 फीट एवं 10 फीट गहराई वाले प्रत्येक डोभा की प्राक्कलित राशि 3.23 लाख है। इन योजनाओं का एमआईएस रिकॉर्ड का सत्यापन जब वास्तविक धरातल पर किया गया तो इसमें मनरेगा मजदूरों की उपस्थिति नगण्य थी। सन्तु पासवान के डोभा में जहां 24 मजदूरों का नाम मस्टर रोल में दिखाया गया है, वहां सिर्फ 3 मजदूर (कबूतरी देवी, रामनंदन यादव और प्रयाग) ही कार्य कर रहे थे। इसी प्रकार उमेश पासवान के डोभा में स्वयं लाभुक सहित 2 अन्य उपस्थित पाए गए। जबकि मस्टर रोल में 32 लोगों के नाम दर्ज हैं। ठीक इसी तरह भदई बथान स्कूल के पूर्व नदी के उस पार टोंगरी के चारों ओर 7 डोभा में से सिर्फ 2 पर ही खुदाई का काम चल रहा था, जहां जांच टीम के पहुंचने से पहले ही बिचौलियों ने मजदूरों को भगा दिया था।

कार्यस्थल पर पहली योजना में 2 प्लास्टिक तगाड़ी, 2 कुदाल, 1 झेलंगी और 1 गैंता तथा दूसरे योजना स्थल पर में 4 प्लास्टिक तगाड़ी, 2 कुदाल, झेलंगी और 2 गैंता पड़ा हुआ था। शेष 5 डोभा ऐसे स्थान पर बनाये गए हैं, जो तकनीकी दृष्टिकोण से पूर्णत: अनुपयुक्त हैं। इन योजना स्थलों पर किसी भी तरह का सूचना बोर्ड नहीं है और न ही जाँच के भय से कोई यह बताने को तैयार है कि उक्त सभी योजनाएं किन नामों से स्वीकृत हैं। इस कारण ऑनलाइन रिकॉर्ड से मिलान करना मुश्किल हो रहा है। लेकिन मनिका गांव के ऑनलाइन ट्रेंड से स्पष्ट होता है कि उन सभी योजनाओं के फर्जी मस्टर रोल संधारित किये जा रहे हैं, जहां कोई काम नहीं चल रहे हैं या कार्य पूर्ण हो चुके हैं। उनमें से एक योजना पर जेसीबी मशीन से काम कराया गया है। मनरेगा अधिनियम के अनुसूची II की धारा 21 में ठेकेदारों और बिचौलियों पर मनाही के बावजूद मनिका में मनरेगा योजनाओं पर बिचौलिये संलिप्त हैं और यह पूरा खेल प्रखंड प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है। मस्टर रोल निर्गत पंजी के अवलोकन से बजापते आन रिकॉर्ड रामचंद्र यादव, गौरी यादव, शम्भू पासवान, केशव यादव, अवधेश यादव और सुनील यादव सरीखे बिचौलियों के नाम मस्टर रोल प्राप्तकर्ताओं के तौर पर दर्ज हैं। रोजगार सेविका ने खुद स्वीकारा कि पूरे पंचायत में सिर्फ 6 मनरेगा मेट पंजीकृत हैं। तब सवाल उत्पन्न होता है कि आखिर कार्यस्थल पर देखरेख और कार्यस्थलों पर सुविधाओं को सुनिश्चित करने की जवाबदेही किसके ऊपर है?

भ्रष्टाचार की एक बड़ी वजह फर्जी प्राक्कलन

मनरेगा में डोभा निर्माण प्रारंभ से ही विवादों के घेरे में रहा है। योजना क्रियान्वयन हेतु जो मॉडल प्राक्कलन निर्धारित है, वह तकनीकी कर्मियों हेतु गाइडेंस मात्र के लिए है और बिल्कुल सपाट भूमि को आधार माना गया है। कनीय अभियंताओं को वास्तविक धरातल की वस्तुस्थिति के अनुरूप प्राक्कलन तैयार करने की प्रशासनिक जवाबदेही है। किन्तु जिन 14 योजनाओं का स्थल निरीक्षण किया गया, सभी योजनाओं में डोभा के आधे भाग से मिट्टी काटकर एक तरफ के मेढ़ में ही मिट्टी डालने का काम किया गया है। जिसे मापकर तकनीकी कर्मी आसानी से वास्तविक कार्य का मूल्यांकन कर सकते हैं। हर डोभा का आधा हिस्सा या तो पहले से बना कोई खेत है, या नीची जमीन है। लेकिन कमीशन की हिस्सेदारी के कारण इंजीनियर पूरी डोभा की लम्बाई चौड़ाई और गहराई का एमबी तैयार कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

मस्टर रोलों के सत्यापन एवं हस्ताक्षर मिलान से हो सकते हैं कई खुलासे

कृष्ण पासवान की जमीन में डोभा निर्माण के कार्य में लगे मजदूरों के सम्बन्ध में उनकी माँ शीला देवी ने बताया कि उसमें सिर्फ सधवाडीह के मजदूरों ने मिट्टी काटने का काम किया था। काम कराने वाले बिचौलिया मनिका, भदईबथान टोला के बिनोद यादव (उम्र 38) पिता द्वारिक यादव हैं। योजना दस्तावेज़ में संधारित मस्टर रोल सत्यापन में पाया गया कि ग्रामीण बैंक, मनिका के सामने वाली गली में निवास करने वाले अयोध्या मोची (कार्ड सं0 75522) जो पिछले 3 वर्षों से लकवा बीमारी से ग्रसित हैं, उनके नाम से फर्जी मस्टर रोल संधारित कर विगत 3 वर्षों में 204 मानव दिवस का कुल 37740 रूपये की निकासी कर ली गई है। इसी भांति घर में डंडे के सहारे निकलने घुसने वाले भदई बथान रोड निवासी मनिका के बुजुर्ग बिरेन्द्र प्रसाद (कार्ड सं0 44419) के नाम से भी 3 सालों में 155 दिन का 28,875 रूपये की निकासी कर ली गई।

सिर्फ इतना ही नहीं ग्रामीण बैंक के बगल में मोबाईल दुकान में पूरा समय बिताने वाले सुजीत कुमार (1236) पिता बिनेश मांझी के नाम से तीन सालों के अन्तराल में 120 मानव दिवस का कुल 22,728 रू. की निकासी कर ली गई है। इतना ​ही नहीं मनिका बाजार के कई किराना दुकानदारों, अंडे दुकान वालों, गेट ग्रिल और नियमित रूप से दूसरे काम करने वालों के नाम से फर्जी जॉब कार्ड आई0 डी0 और मस्टर रोल संधारित कर अंधाधुंध राशि की लूट की जा रही है, जो कभी भी मनरेगा कार्यों में नहीं गए हैं। एमआईएस (मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) रिकार्ड के अनुसार खर्च (उमेश पासवान) 53,490 रुपये। जबकि स्थल मापी के अनुसार लगभग 12,000 रूपये है। एमआईएस के अनुसार खर्च (विशुनती कुंवर) 52,380 रुपये, जबकि स्थल मापी के अनुसार लगभग 23,668 रूपये है।

मनरेगा मजदूरों का हो रहा है शोषण

सन्तु पासवान के डोभा निर्माण में लगे मजदूरों (रामनंदन यादव व पत्नी सबुरी देवी, प्रयाग बैठा) ने बताया कि डोभा मालिक 100 घन फीट मिट्टी काटने के एवज में 250 रूपये प्रति चौका मजदूरी नगद तथा खाता में भी देते हैं। इसी तरह सधवाडीह, नवाटोली (नामुदाग पंचायत) के मजदूरों ने मोबाईल पर बताया कि ठेकेदार विनोद यादव उनको 100 घन फीट मिट्टी काटने के एवज में 250 रूपये प्रति चौका नगद मजदूरी तथा खाता में मिला कर देते हैं। जबकि मनरेगा में मिट्टी के प्रकार के अनुसार 73, 54 और 44 घन फीट में ही एक हाजरी का भुगतान किया जाना है। मजदूरों को ढाई सौ रूपये देने की आड़ में एक तरफ जहां प्रत्येक सप्ताह 60 मजदूरों के फर्जी नाम भरे जा रहे हैं, वहीं बिचौलिए मजदूरों से लगभग दो गुने काम ले रहे हैं।

जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग

नरेगा सहायता केंद्र मनिका की टीम ने जिला प्रशासन से मांग किया है कि जिला प्रशासन तत्काल एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर योजनाओं की सघन जांच करवाए जिसमें तकनीकी अधिकारी भी शामिल हों। जांच पूरी होने तक तत्काल सभी मजदूरी भुगतान पर रोक लगायी जाय। सभी योजना स्थलों पर सूचना बोर्ड लगाना सुनिश्चित किया जाय। भौतिक रूप से पूर्ण योजनाओं को एमआईएस में भी बंद किया जाय ताकि आगे इन योजनाओं पर भुगतान को रोका जा सके। अनुपयोगी योजनाओं को यथाशीघ्र बंद किया जाय। फर्जी तरीके से निकासी की गई राशि 12 फीसदी ब्याज के साथ वसूली की जाए।

योजना स्थल भ्रमण टीम में शामिल नरेगा सहायता केंद्र के सदस्यगण

(1) जेम्स हेरेंज (झारखण्ड नरेगा वाच एवं सहायता केंद्र, मनिका) फोन 9852910778

(2) ज्यां द्रेज (झारखण्ड नरेगा वाच एवं सहायता केंद्र, मनिका)

(3) पचाठी सिंह (नरेगा सहायता केंद्र, मनिका)

(4) अमरदयाल सिंह (नरेगा सहायता केंद्र, मनिका)

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on April 14, 2021 9:11 pm

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