सुप्रीम कोर्ट का न्यायिक आयोग गठन करने की बंगाल सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने से इंकार

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के क्या दिन आ गये हैं?चीफ जस्टिस के पद पर जस्टिस एनवी रमना के बैठने के पहले कोर्ट में इधर तुषार मेहता किसी भी मामले में सरकार की और से खड़े होते थे और पीठ सरकार से बिना सवाल पूछे मामले को रफा दफा कर देती थी। पर अब स्थितियां बदल गयी हैं। सॉलिसिटर जनरल मेहता न्यायिक आयोग का गठन करने वाली पश्चिम बंगाल सरकार की अधिसूचना को असंवैधानिक कहते रह गये लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इस पर रोक लगाने से इंकार कर दिया।

उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने ने बुधवार को पेगासस स्पाइवेयर मामले की जांच के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जस्टिस मदन बी लोकुर की सदस्यता और ज्योतिर्मय भट्टाचार्य की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित करने की अधिसूचना पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने हालांकि रिट याचिका पर नोटिस जारी किया और इसमें शामिल सभी पक्षकारों, यू‌नियन ऑफ इंडिया, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालया और पश्चिम बंगाल राज्य से जवाब माँगा ।

पेगासस मुद्दे की जांच की मांग करने वाली अन्य याचिकाओं के साथ मामले को 25 अगस्त को सूचीबद्ध करने का निर्देश देते हुए पीठ ने याचिकाकर्ता ग्लोबल विलेज फाउंडेशन पब्लिक ट्रस्ट से प्रतिवादियों को एक प्रति देने के लिए कहा है। जांच आयोग अधिनियम की धारा 2ए का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट सौरभ मिश्रा ने कहा कि अधिसूचना को मुख्य रूप से अधिकार क्षेत्र की कमी के आधार पर चुनौती दी जा रही है। पीठ ने कहा कि आपके हलफनामे में कुछ विसंगति है। आप कहते हैं कि आप जांच चाहते हैं, और फिर आप कहते हैं कि समिति असंवैधानिक है। हलफनामे में, आपको सुसंगत होना चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अधिसूचना असंवैधानिक है और कहा कि वह संवैधानिक पहलू पर न्यायालय की सहायता करेंगे। पीठ ने सुझाव दिया कि वर्तमान मामले को पेगासस स्पाइवेयर की जांच की मांग वाली अन्य रिट याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया जाए। पीठ ने कहा कि हम अन्य रिट याचिकाओं के साथ इसे रखेंगे, तब तक अगर वे काउंटर फाइल करना चाहते हैं तो वे फाइल कर दें।

सौरभ मिश्रा ने हालांकि जोर देकर कहा कि अदालत द्वारा एक अंतरिम आदेश पारित किया जाना चाहिए। उन्होंने जांच समिति की आगे की कार्यवाही पर रोक के रूप में अंतरिम राहत की मांग की। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया है और कार्यवाही दिन-प्रतिदिन हो रही है। हालांकि पीठ ने अंतरिम प्रार्थना को ठुकराते हुए कहा कि यह केवल एक प्रारंभिक सुनवाई है। मिश्रा ने तर्क दिया कि जब उच्चतम न्यायालय राष्ट्रीय स्तर पर जांच पर विचार करने में व्यस्त है तो राज्य समिति को कार्य नहीं करना चाहिए।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस मदन बी लोकुर और कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस, जस्टिस ज्योतिर्मय भट्टाचार्य की अध्यक्षता में जांच आयोग का गठन किया था, जो पेगासस स्पाइवेयर मामले से संबंधित आरोपों की जांच करेगा। पश्चिम बंगाल सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव बीपी गोपालिका ने सोमवार को इस आशय की अधिसूचना जारी की।

आयोग का गठन उन आरोपों के बाद किया गया जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के समय मुख्यमंत्री के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की कथित तौर पर पेगासस स्पाइवेयर द्वारा जासूसी की गई थी। समाचार पोर्टल द वायर ने 16 अन्य मीडिया संगठनों के साथ एक ‘स्नूप लिस्ट’ का खुलासा किया था, जिसमें दिखाया गया था कि एक्टिविस्ट, राजनेता, पत्रकार, जज और कई अन्य व्यक्ति इजरायली फर्म एनएसओ ग्रुप के पेगासस सॉफ्टवेयर के माध्यम से किए गए साइबर-निगरानी के संभावित लक्ष्य थे।

अधिसूचना विवरण अधिसूचना में कहा गया है कि विभिन्न अधिकारियों, राजनेताओं, पत्रकारों, न्यायपालिका के सदस्यों के साथ-साथ अन्य लोगों के मोबाइल फोन 2017 से अवैध रूप से निगरानी सॉफ्टवेयर का उपयोग करके हैक कर लिए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप राज्य और संबंधित व्यक्तियों की गोपनीयता का संभावित उल्लंघन हुआ। रिपोर्ट की गई इंटरसेप्शन स्टेट या नॉन-स्टेट एक्टर्स के हाथों में जा सकती है, जो अगर सच पाई जाती है तो राज्य की सार्वजनिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा सकती है और यह एक गंभीर अपराध है।

आयोग से कहा गया है कि वह अधिसूचना की तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर निष्कर्षों और सिफारिशों वाली अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे। इसके अलावा आयोग को जांच की अपनी प्रक्रिया तैयार करने और जब भी आवश्यक हो संबंधित व्यक्तियों को नोटिस देने के लिए स्वायत्तता दी गई है।

चिदंबरम बोले

उच्चतम न्यायालय की ओर से कथित पेगासस जासूसी मामले में केंद्र को नोटिस जारी किये जाने की पृष्ठभूमि में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने बुधवार को दावा किया कि सरकार के पास स्पाईवेयर की सूचना है। चिदंबरम ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल का सर्वोच्च अदालत के समक्ष यह कहना पेगासस के उपयोग की स्वीकारोक्ति है कि इस स्पाईवेयर के बारे में सरकार के पास सूचना है जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। पूर्व गृह मंत्री ने यह सवाल भी किया कि आखिर पेगासस का उपयोग किस मकसद से किया गया?

चिदंबरम ने ट्वीट करते हुए लिखा कि सॉलिसिटर जनरल ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि सरकार के पास सूचना है जिसे हलफनामे के जरिये सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। यह इस बात की स्वीकारोक्ति है कि इस सॉफ्टवेयर-स्पाईवेयर का उपयोग किया गया। यह किसके लिए इस्तेमाल हुआ, हम यह नहीं जानते। चिदंबरम ने कहा, हम यह जरूर जानते हैं कि एक स्पाईवेयर का उपयोग किया गया जिससे पेगासस कहते हैं। इसके इस्तेमाल का मकसद क्या था? अगर सरकार इस सवाल का जवाब दे तो शेष सवालों के जवाब अपने आप मिल जाएंगे।

कांग्रेस ने पेगासस मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए समिति गठित करने संबंधी केंद्र सरकार के हलफनामे को लेकर सोमवार को उस पर निशाना साधा और सवाल किया कि बिल्ली दूध की रखवाली कैसे कर सकती है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह बताना चाहिए कि क्या उनकी सरकार ने पेगासस स्पाईवेयर को खरीदा था या नहीं?

सुरजेवाला ने केंद्र के हलफनामे को लेकर संवाददाताओं से कहा, ‘बिल्ली दूध की रखवाली कैसे कर सकती है? क्या अपराधी खुद की जांच करेगा? मोदी जी सीधा जवाब दें कि आपने पेगासस स्पाईवेयर खरीदा या नहीं?’ इससे पहले उन्होंने ट्वीट किया, ‘जासूसीजीवी जी, केवल इतना बता दीजिए,पेगासस जासूसी स्वाईवेयर ख़रीदा या नहीं। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा कहां से आ गई ?

कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि न्यायाधीशों की जासूसी, विपक्ष की जासूसी, सीबीआई प्रमुख की जासूसी, पत्रकारों की जासूसी, केंद्रीय मंत्रियों की जासूसी, वकीलों की जासूसी, ये सब “राष्ट्रीय सुरक्षा” कैसे है? कितना और बरगलाएंगे?’

 (वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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