(संदर्भ : 9—10 अप्रैल, प्रगतिशील लेखक संघ का स्थापना दिवस) साल 1936 में लखनऊ के मशहूर ‘रिफ़ाअ-ए-‘आम’… Read More
बीच बहस
जब हम बिजली जैसी सेवा को समकालीन जीवन के परिप्रेक्ष्य में देखते हैं, तो यह स्पष्ट हो… Read More
युद्ध कभी अचानक नहीं रुकते—वे ठहरते हैं, सांस लेते हैं, और फिर या तो नए रूप में… Read More
तमिलनाडु के सथानकुलम कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) प्रकरण में दिया गया हालिया न्यायिक निर्णय केवल एक… Read More
खाड़ी युद्ध की खबरों के बीच एक छोटी सी, परंतु बेहद ही महत्वपूर्ण खबर दबकर मर गई।… Read More
बग़दादी जूता: अमेरिकी राष्ट्रपति बुश की प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकार ज़ैदी द्वारा जूता मारने की कहानी
नेताओं व अफसरों पर जूता फेंकना चलाना मारना, विरोध का एक जाना माना तरीका है, हालांकि किसी… Read More
हानि-लाभ, जीवन-मरन, जस-अपजस बिधि हाथ। पंक्तियां तुलसीदास जी की हैं। दुनिया को देखने का तुलसीदास का नजरिया… Read More
पिछले महीने ब्रिटेन की मशहूर पत्रिका ‘द इकानमिस्ट’ की संपादक जैनी मिल्टन बेडोज़ के एक इंटरव्यू पर… Read More
रात का घना सन्नाटा था। श्मशान की डरावनी खामोशी को चीरते हुए राजा विक्रम ने एक बार… Read More
सूरत, मुंबई, पूना और फिर दिल्ली के रेलवे स्टेशनों से मजदूरों के गांव लौटने के दृश्य कुछ… Read More