बीच बहस

बकौल मुक्तिबोध प्रगतिशील लेखकों को अभिव्यक्ति के ख़तरे उठाने ही होंगे!

प्रगतिशील साहित्य ‘विज्ञान से प्रेम’ और ‘कला जनता के लिए’ इन दो सिद्धन्तों को मिलाकर चलता है।… Read More