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Saturday, September 25, 2021

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art

कबिरा खड़ा बज़ार (जेल) में!

भगत सिंह को सही अर्थों में वही लोग याद कर रहे हैं, जो उनके दर्शाए रास्ते पर चलकर संघर्ष कर रहे हैं। भगत सिंह ने दलितों को कहा था, “तुम असली श्रमजीवी हो!” हमारे देश में संघर्ष करने वाले...

कला-संस्कृति: दूसरा कोई बलवंत गार्गी नहीं

                                                                             ...

फासीवाद को सबसे बड़ा खतरा कला से लगता है

कलाकार (कवि, फिल्म लेखक, संगीतकार, आर्ट एक्टिविस्ट) मयंक मुंबई से दिल्ली तक एनआरसी-सीएए-एनपीआर के खिलाफ़ देशभर में चल रहे जनांदोलन में अपनी कला के जरिए प्रतिरोध को अलग ही मुकाम दे रहे हैं। जनचौक के लिए सुशील मानव से...

सीएए और एनआरसी के खिलाफ़ धरने पर कला

मौजूदा सरकार द्वारा सीएए, एनआरसी और एनपीआर के द्वारा देश की अवाम के खिलाफ़ छेड़े गए युद्ध के प्रतिरोध में व्यापक जन आंदोलन उठ खड़ा हुआ है। मुल्क, संविधान और इंसान बचाने के इस जन आंदोलन में कलाकारों की...

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है!

कला मनुष्य को एक ऐसी दुनिया से साक्षात्कार कराती है,जिसमें वह सबकुछ दिखता है,जो अमूमन दिखायी पड़ने वाली दुनिया में दिखायी नहीं पड़ता।ऐसा शायद इसलिए,क्योंकि कला को जो कोई अंजाम दे रहा होता है,वह उस कला की बारीरिकयों में...
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लगातार भूलों के बाद भी नेहरू-गांधी परिवार पर टिकी कांग्रेस की उम्मीद

कांग्रेस शासित प्रदेशों में से मध्यप्रदेश में पहले ही कांग्रेस ने अपनी अंतर्कलह के कारण बहुत कठिनाई से अर्जित...
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