Sunday, October 24, 2021

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Muslims

क्या भारत में धर्मनिपेक्षता अतीत का अवशेष बन गई है ?

करोड़ों भारतीय आतुर थे कि हमारे देश के खिलाड़ी टोक्यो ओलम्पिक में शानदार प्रदर्शन करें और अधिक से अधिक संख्या में पदक लेकर स्वदेश लौटें। अनेक भारतीय खिलाड़ियों ने दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित खेल स्पर्धा में पदक जीते। परन्तु...

यूपी में मुस्लिमों को एक बार फिर से निशाने पर लेने के पीछे 2022 के विधानसभा चुनाव तो नहीं हैं ?

24 करोड़ की आबादी वाले देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश को योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में जिस प्रकार से संचालित किया गया है, वह अपनेआप में पुलिसिया राज के साए में इतनी बड़ी आबादी को बनाये रखने...

जिस जमात को बताया था कोरोना फैलाने का दोषी, संकट में वह कर रहे हैं बढ़चढ़ कर मदद

इस समय भारत कोरोना महामारी के सबसे विकट दौर से गुजर रहा है। संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है और मौतें भी। हर चीज की कमी है- अस्पतालों में बिस्तरों की, दवाईयों की, ऑक्सीजन की, जांच सुविधाओं की और...

2020 के कई कानूनों से समुदायों में बढ़ा भेदभाव, देश का सामाजिक तानाबाना भी हुआ कमज़ोर

पिछले अनेक दशकों से भारत में सांप्रदायिक दंगे, सांप्रदायिक तनाव और हिंसा का सबसे आम प्रकटीकरण रहे हैं। देश में अनेक भयावह सांप्रदायिक दंगे हुए हैं, जिनमें नेल्ली (1983), दिल्ली सिक्ख-विरोधी हिंसा (1984), भागलपुर (1989), बंबई (1992), गुजरात (2002),...

देश के 32 लाख हथकरघा कामगारों के सामने भुखमरी के हालात

वो मई का महीना था, जब दिल्ली के सीलमपुर से आशा नाम की एक महिला ने मेरे मोबाइल नंबर पर फोन कर कहा था, “राशन दिलवा दीजिए नहीं तो हम भूखे मर जाएंगे। मेरे बच्चे तीन दिन से भूखे...

भगवा आतंकियों ने शिव विहार की मदीना गली को तबाह कर दिया, नाजी मीडिया ने जानबूझकर नहीं दिखाई खबर

उत्तर पूर्वी दिल्ली के हिंदू बाहुल्य शिव विहार में सबसे ज़्यादा कहर ढाया गया है। इसके बावजूद मीडिया लगातार शिव विहार में हुई बर्बरता की रिपर्टिंग से परहेज कर रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि शिव...

सीएए, एनआरसी विरोधी आंदोलन से आशा और संभावनाएं

कश्मीर-समस्या, मंदिर-मस्जिद विवाद, असम-समस्या (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) और नागरिकता संशोधन कानून पर सरकार के फैसलों की चार बातें स्पष्ट हैं: (1) फैसले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की नीयत से प्रेरित हैं। (2) फैसलों में लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं का...

ग्राउंड रिपोर्टः मजबूर कॉलोनी का नारा है, हिंदुस्तान हमारा है

‘मजबूर कॉलोनी का नारा है, हिंदुस्तान हमारा है’। ये बिल्कुल यूनिक सा नारा अपनी राष्ट्रीयता को क्लेम करते हुए अनशन पर बैठी मजबूर नगर, मंडावली दिल्ली की स्त्रियों ने गढ़ा है। बता दें कि देश में एनपीआर-एनआरसी-सीएए के खिलाफ़...

ग्राउंड रिपोर्टः एनआरसी मुसलमानों से ज्यादा दलितों-गरीबों के खिलाफ

फैजाबाद जिले की तहसील रुदौली का एक गांव है बिबियापुर। यह गांव फैजाबाद और राजधानी लखनऊ के ठीक बीच में पड़ता है। लखनऊ-फैजाबाद रोड से तकरीबन पांच किलोमीटर अंदर। यह गांव मिश्रित आबादी वाला है। मुसलमानों के साथ ही...

यूपी में लोग गोलियां खाते रहे, गिरफ्तार होते रहे और मुख्य विपक्षी दल सोते रहे

पूरे देश में सीएए और एनआरसी को लेकर प्रदर्शन जारी हैं। इसके उलट यूपी में विपक्षी सियासी पार्टियों ने प्रदर्शनकारियों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। विपक्ष की रहस्यमय खामोशी का ही नतीजा है कि यहां सत्ता के...
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कोविड काल के दौरान बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति का हुआ बड़े स्तर पर ह्रास

कोविड काल में बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति का काफी बड़ा नुकसान हुआ है। इसका खुलासा ज्ञान विज्ञान समिति...
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