Friday, December 9, 2022

song

प्रेम धवन, जिनके गाने आज भी लोगों को देश प्रेम के रंग में डुबो देते हैं

प्रेम धवन की शिनाख़्त एक वतनपरस्त गीतकार की रही है। जिन्होंने अपने गीतों से देशवासियों में वतनपरस्ती का जज़्बा जगाया। एकता और भाईचारे का पैग़ाम दिया। प्रेम धवन, शुरुआत से ही प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़ गए थे। पढ़ाई...

स्मृति दिवस पर विशेष: ‘बेड़ु पाको’ के बहाने पहाड़ी लोक के चितेरे मोहन उप्रेती की याद

''बेड़ु पाको बारामासा.. ओ नरैण काफल पाको चैता.. मेरी छैला.. रूण-भूणा दीन आया.. ओ नरैण मैं पुजै दे मैत.. मेरी छैला..'' दिसम्बर 1955 की दिल्ली की किसी सर्द दोपहर, तीन मूर्ति भवन के सभागार में बर्फ़ के फ़ॉहों जैसी मखमली आवाज़ों...

‘ढाई आखर प्रेम के’ यात्रा: दुनिया लोग बदलते हैं, यह लोगों को याद दिलाना है

कोविड के सामाजिक दूरी बनाये रखने के दौर के ख़त्म हो जाने पर 4-5 दिसंबर 2021 को भारतीय जन नाट्य संघ (इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन यानि इप्टा) की राष्ट्रीय समिति की बैठक जालंधर में हुई थी। सत्यजित राय, अमृतराय...

जीते जी किसी के सामने न झुकने वाले मज़रूह को मौत के बाद झुकाने की कोशिश

मजरूह सुल्तानपुरी के गृह जनपद सुल्तानपुर जिसके कुशभवनपुर होंने की चर्चा आम है, में एक पार्क इस इंक़लाबी शायर के नाम पर है। तस्वीर में पार्क में घास-फूस का जंगल उगा हुआ है तो जनाब के नाम का लगा...

ऐसा आसां नहीं है सागर सरहदी होना

अभी-अभी इलाहाबाद के रंगकर्मी प्रवीण से खबर मिली कि सागर सरहदी नहीं रहे। सागर साहब मुंबई में थे, वहीं आज सुबह किसी लम्हे में उन्होंने  आखिरी सांस ले ली। सागर साहब के बारे में  करने के लिए मेरे पास...

जयंती पर विशेष: खुमार बाराबंकवी, जिनकी शायरी का खुमार आज भी दिल से उतारे नहीं उतरता

खुमार बाराबंकवी का शुमार मुल्क के उन आलातरीन शायरों में होता है, जिनकी शानदार शायरी का खुमार एक लंबे अरसे के बाद भी उतारे नहीं उतरता है। एक दौर था जब खुमार की शायरी का नशा, उनके चाहने वालों...

जन्मदिन पर विशेष: अमीर ख़ान; राह चलता फकीर जिसका जहान संगीत में ही बनता, खुलता और बंद होता था!

अमीर ख़ान का गाना सुनते हुए आप सबसे पहले क्या राय बनाते हैं उनके बारे में? क्या बना सकते हैं? मुझे प्रमोद कौंसवाल भाईसाब से सबसे पहले उनका नाम पता चला और गायन भी। फिर दिल्ली में मंगलेश जी...

जिसकी धुन में राग-रागिनी ही नहीं हिस्ट्री-ज्योग्राफ़ी भी

राग-रागिनी के नोट्स बनाना और उसे रियाज़ के ज़रिये अपने मौसिक़ी में उतार लेना एक बात है, मगर राग-रागिनी को उस माहौल उस साज़-ओ-अंदाज़ में देखने-परखने की ज़िद, जिसमें वे बने थे, बिल्कुल एक जुनून का मामला है। इस जुनून को एक...
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मुश्किल में बीजेपी, राहुल बना रहे हैं कांग्रेस का नया रास्ता

इस बार के चुनावों में सभी के लिए कुछ न कुछ था, लेकिन अधिकांश लोगों को उतना ही दिखने...
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