Sunday, December 4, 2022

उत्तराखंड में फिर तबाही; कहीं बादल फटा, कहीं अतिवृष्टि

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देहरादून। उत्तराखंड में मॉनसून अब तक बेशक कमजोर रहा हो, लेकिन मॉनसून में आखिरी पड़ाव खतरनाक साबित हो रहा है। परसों यानी 19 अगस्त से राज्य के अनेक हिस्सों में शुरू हुआ बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। इस दौरान देहरादून के रायपुर क्षेत्र और पौड़ी जिले के यमकेश्वर में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। टिहरी जिले के कीर्तिनगर और बड़ियारगढ़ क्षेत्र में भी अतिवृष्टि से नुकसान होने की सूचना है। पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य के देहरादून, पौड़ी, टिहरी और नैनीताल जिलों में सबसे ज्यादा बारिश हुई है। देहरादून शहर को जौलीग्रांट एयरपोर्ट से जोड़ने वाला सौंग नदी के पुल का एक बड़ा हिस्सा टूट गया। इसमें एक मोटरसाइकिल सवार युवक बह गया। उसे बाद में रेस्क्यू किया गया। एक अन्य युवक के भी बहने की सूचना है, उसका अभी तक कोई अता-पता नहीं है। पौड़ी जिले के यमकेश्वर क्षेत्र में एक मकान ढह जाने से एक महिला की मलबे में दबकर मौत हो गई है।

अब तक देहरादून में सबसे ज्यादा नुकसान होने की खबरें आ रही हैं। शहर के रायपुर क्षेत्र में बादल फटने से काफी तबाही हुई है। इस क्षेत्र के सभी नदी-नाले उफान पर हैं। शहर के महाराणा स्पोर्ट्स कॉलेज के कुछ ही दूरी पर स्थित सौंग नदी पर बने पुल का एक हिस्सा तेज बहाव में बह गया। सूचना के अनुसार घटना के समय एक बाइक सवार युवक पुल से गुजर रहा था। वह बाइक सहित नीचे गिर गया और नदी की तेज धार में बह गया। बाद में एसडीआरएफ को सूचना मिली कि एक युवक पुल से कुछ नीचे टापू पर फंसा हुआ है। एसडीआरएफ ने मौके पर पहुंचकर खतरनाक परिस्थितियों में राफ्ट की मदद से युवक का रेस्क्यू किया। 

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यमकेश्वर क्षेत्र में बादल फटने से हुई तबाही

रायपुर क्षेत्र के ही माल देवता इलाके में सौंग का जलस्तर बढ़ जाने से सात घरों को नुकसान हुआ। कुछ घर पूरी तरह बह गये हैं। यहां भी एक स्कूटर सवार युवक के बह जाने की सूचना है, हालांकि इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। सरखेत गांव में देर रात अचानक पानी भर जाने से गांव में रहने वाले 40 परिवार फंस गये। पुलिस और एसडीआरएफ ने देर रात बचाव अभियान शुरू कर गांव से सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। गांव में कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हो गये हैं, उन्हें एयरलिफ्ट करके हॉस्पिटल पहुंचाया जा रहा है। गांव के प्रभावित परिवारों को फिलहाल आसपास के रिजार्ट में रखा गया है।

यहां सरकारी स्तर पर लोगों को ठहराने की कोई व्यवस्था नहीं है। प्रेमनगर क्षेत्र में भी नदी के बहाव में फंस गये एक व्यक्ति को एसडीआरएफ ने देर रात रेस्क्यू किया। देहरादून के तिमली, मानसिंहवाला, भैंसबाड़ा, सेरकी, चमरौली आदि गांवों में नुकसान की सूचना है। देहरादून की डीएम सोनिका सुबह ही प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के लिए निकल चुकी थीं। 

ऋषिकेश से लगते पौड़ी जिले के यमकेश्वर क्षेत्र में बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। यहां नीलकंठ महादेव के आस पास कई नदी नाले उफान पर हैं। यमकेश्वर ब्लॉक के विनकगांव में तीन मकान तेज बारिश में टूट गये। इस घटना में एक महिला की मलबे में दबने से मौत हो गई है। इसके अलावा घट्टूगाड़, बैरागढ़, तालाघाटी, नीलकंठ महादेव, आदि जगहों पर भी नुकसान होने की सूचना है।

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नुकसान का जायजा लेने निकली देहरादून की डीएम सोनिका।

टिहरी जिले के धनोल्टी और कीर्तिनगर क्षेत्र में भारी बारिश के कारण नुकसान हुआ है। मसूरी से लगते धनोल्टी तहसील के कुमाल्डा, भुत्सी, मालदेवता, ल्वारखा और सीतापुर आदि जगहों पर बारिश ने कहर बरपाया है। कुछ जगहों पर घरों में धंसाव आ गया है, जब कि कुछ गांवों में लोगों के खेत बह गये हैं। देहरादून जिले में पहुंचने से पहले सौंग नदी ने टिहरी जिले में भी कई जगहों पर नुकसान पहुंचाया।

रगड़ के पास भी सौंग नदी का एक पुल टूट गया है, जिससे टिहरी जिले की सकलाना पट्टी के एक दर्जन से ज्यादा गांवों का संपर्क कट गया है। रगड़ का राजकीय इंटर कॉलेज और बाजार भी खतरे की जद में आ गये हैं। उधर टिहरी जिले के कीर्तिनगर और बड़ियारगढ़ इलाके में भी भारी बारिश के कारण दर्जनों ग्रामीण संपर्क मार्ग टूट गये हैं और बरसाती नाले उफान पर हैं। डागर, धारी, ढूंढसीर क्षेत्र में बड़ी तबाही हुई है। 

सैकड़ों मोटर मार्ग बंद

राज्य में कुछ जिलों में हुई भारी बारिश के कारण सैकड़ों मोटर मार्ग बंद हो गये हैं। हालांकि शनिवार दोपहर तक राज्य सरकार की ओर से बंद हुई सड़कों का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है। लेकिन फिलहाल राज्य के चारों धामों को जाने वाले नेशनल हाईवे कई जगहों पर बंद हैं। बदरीनाथ रोड ऋषिकेश से देव प्रयाग के बीच एक दर्जन से ज्यादा जगहों पर बंद है। हालांकि चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में यह सड़क खुली हुई है। गंगोत्री और यमुनोत्री रोड भी कई जगहों पर बंद हो गई है। देहरादून के रायपुर, पौड़ी के यमकेश्वर और टिहरी जिले के धनोल्टी और कीर्तिनगर क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण सड़कें बंद हैं।

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देहरादून शहर को जौलीग्रांट एयरपोर्ट से जोड़ने वाला सौंग नदी का पुल बहा।

राज्य में 19 अगस्त की दोपहर तक 13 में से 11 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी। पिछले 24 घंटों में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार 19 अगस्त को दोपहर बाद से पौड़ी जिले के नीलकंठ में सबसे ज्यादा 342.0 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा में 335 मिमी, टिहरी के नरेन्द्र नगर में 331.0 मिमी, देहरादून के सहस्रधारा में 225.0 मिमी, पौड़ी के यमकेश्वर में 290.0 मिमी, मसूरी में 192.0 मिमी, काशीपुर में 159.0 मिमी, नैनीताल में 136.0 मिमी, कालाढूंगी में 135.0 मिमी, बूढ़केदार में 140.0 मिमी, हल्द्वानी में 104 मिमी, बेतालघाट में 114.0 मिमी, रामनगर में 100.0 मिमी, भीमताल में 108.0 मिमी, रायवाला में 102 मिली बारिश दर्ज की गई। 

क्या अनियमित विकास है कारण

उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में, खासकर देहरादून, पौड़ी और टिहरी जिलों में हुई तबाही के बाद एक बार फिर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या इस तबाही का कारण अनियमित विकास है। इस बार में उत्तराखंड वानिकी और औद्यानिकी विश्वविद्यालय के भूवैज्ञानिक डॉ. एसपी सती स्पष्ट रूप से कहते हैं कि यह सब अनियमित विकास का नतीजा है। बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित देहरादून के रायपुर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए वे कहते हैं कि इस क्षेत्र में पहली बार इतनी ज्यादा बारिश नहीं हुई है।

पहले भी ऐसी बारिश होती रही हैं। लेकिन इस क्षेत्र में आप जाएंगे तो पाएंगे कि हाल के वर्षों में यहां बड़े पैमाने पर निर्माण हुए हैं। खासकर होटल और रिसार्ट की बाढ़ आई हैं। सड़कें और पुल भी बने हैं और इनका मलबा एक बार फिर यहां से गुजरने वाली सौंग, टौंस आदि नदियों में डंप किया गया है। इसके निर्माणों के लिए बड़े पैमाने पर वैध और अवैध तरीके से पेड़ों का कटान भी हुआ है। इस क्षेत्र में वह सहस्रधारा रोड भी है जहां हजारों की संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं। 

देहरादून की हरियाली के लिए संघर्ष कर रहे सिटीजन फॉर ग्रीन दून के हिमांशु अरोड़ा भी इस तबाही के लिए सीधे तौर पर हरियाली नष्ट किये जाने को जिम्मेदार ठहराते हैं। वे कहते हैं कि अब भी हम नहीं संभले और सौंग, टौंस, जाखन व तमसा जैसी दून से बहने वाली नदियों के कैचमेंच एरिया को विकास के नाम पर बर्बाद करते रहे तो भविष्य में और ज्यादा गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

(देहरादून से वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोचन भट्ट की रिपोर्ट।)

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