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कॉरपोरेट की घुसपैठ से बढ़ीं ‘डायन’ हत्याएं, आदिवासियों के जंगल-जमीन पर कब्जे की साजिश

जब डायन-बिसाही के नाम पर हत्या का जिक्र होता है तो झारखंड का नाम सबसे ऊपर होता है। इसके पीछे की वजह की गहराई से पड़ताल करें तो यह साफ हो जाता है कि डायन हत्या अंधविश्वास के बहाने आदिवासियों के जंगल और पहाड़ पर कब्जे की एक गहरी साजिश का हिस्सा है। ठीक उसी तरह जिस तरह आदिवासियों को हिंदू बता कर उनकी सामूहिक ताकत और उनके प्रतिरोध की क्षमता को कमजोर करके उनके जल, जंगल, जमीन पर कब्जा करने की कारपोरेटी साजिश है।

एनसीआरबी के 2015 से 2019 तक की रिपोर्ट के अनुसार पूरे भारत में पिछले पांच साल में डायन-बिसाही के नाम 656 हत्याएं हुई हैं। इसमें से 217 सिर्फ झारखंड में हुई हैं, जबकि झारखंड पुलिस के मुताबिक 235 हत्याएं हुई हैं। कहना न होगा कि इस मामले में झारखंड शीर्ष पर रहा है। हाल की घटनाओं पर नजर डालें तो 15 सितंबर 2020 को रांची के बेड़ो थाना क्षेत्र की नेहालु पंचायत के रोगाडीह पतरा टोली गांव में अहले सुबह डायन-बिसाही के शक में 75 वर्षीय मंगरा उरांव और 55 वर्षीया बिरसी उराइन दंपति की हत्या कर दी गई।

इस हत्या की क्रुरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ग्रामीणों की भीड़ में शामिल दर्जनों महिला-पुरुष चीत्कार करती बिरसी उराइन को लाठी-डंडे से तब तक पीटते रहे जब तक उसने दम नहीं तोड़ दिया। वहीं बिरसी उराइन के पति मंगरा उरांव भी अपनी पत्नी का बीच-बचाव में इतना घायल हो गए कि शाम तक उनकी भी मौत हो गई।

घटना के संबंध में मृत दंपति के पुत्र ने सोमरा उरांव द्वारा बेड़ो थाने में हत्या का मामला दर्ज कराया है। सोमरा उरांव के अनुसार उनकी मां बिरसी की कुछ दिनों से मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह अक्सर रात में घर से बाहर निकल जाया करती थीं। 14 सिंतंबर की रात करीब एक बजे वह घर से निकल गईं थी। उसके बाद पिता ने उन्हें रात में घर लाकर सुला दिया था। बाद में हम लोग भी सो गए। सुबह उठे तो गांव में हो-हल्ला सुनकर अखरा के पास पहुंचे, देखा कि मां मृत पड़ी हुई थीं। वहीं पिता घायलावस्था में पड़े हुए थे। पिता मंगरा उरांव को बेड़ो अस्पताल ले जाया गया, जहां शाम को उनकी मौत गई। सोमरा ने बताया कि गांव के 100 से 150 की संख्या में शामिल लोगों ने डायन बिसाही का हवाला देकर मेरी मां की हत्या कर दी है।

उक्त घटना के छह दिन पहले गुमला जिले के घाघरा थाना क्षेत्र के सलामी गांव में 9 सितंबर 2020 को 75 वर्षीय शनिचरिया देवी को डायन बताकर गांव का ही पांडु उरांव ने डंडे से पीटकर हत्या कर दी। इस संबंध में मृतक का पोता रविंद्र खड़िया ने बताया कि बुधवार को जब उसकी दादी घर से नहाने के लिए नहर जा रही थीं, तभी पांडु उरांव ने उन पर डंडे से हमला कर दिया। उसने शनिचरिया देवी को डायन बताकर इतना पीटा कि उनकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई। इस मामले में ग्रामीणों ने पुलिस के डर से आरोपी पांडु उरांव को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। आरोपी पांडू उरांव मानता है कि वृद्ध महिला डायन थी, उसी के कारण उसकी मां और पत्नी हमेशा बीमार रहती हैं। साथ ही लगभग 20 वर्ष पूर्व उसके पिताजी को भी वृद्ध महिला ने जादू करके मार दिया था।

अंधविश्वास के इस मकड़जाल में जिस तरह से गांव के लोग फंसे हुए हैं, वह चिंता का विषय तो है ही, काफी खतरनाक भी है। 17 अगस्त 2020 को गिरिडीह के गांवा थाना क्षेत्र के खेसनरो गांव में एक 30 वर्षीय महिला को डायन बता कर कुल्हाड़ी एवं लाठी से मार कर हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि खेसनरो गांव निवासी मनोज यादव की पत्नी गीता देवी को बीते कई सालों से कुछ लोगों द्वारा डायन बता कर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।

जब वह 17 अगस्त की सुबह कहीं से अपने घर आ रही थीं कि 15-20 की संख्या में कुछ लोगों ने उन पर लाठी डंडे और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया, इसके बाद घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। मामले पर मृतका की सास और बेटी ने पड़ोस में रहने वाले मुंशी महतो, मंजू देवी, मालती देवी, कालिका कुमारी, सपना देवी, कपिल यादव, दिलीप यादव, सुनीता देवी, धनराज यादव समेत 15 से ज्यादा लोगों पर हत्या का आरोप लगाया है।

वहीं 7 जुलाई 2020 को साहिबगंज जिले के राधानगर थाना क्षेत्र की मोहनपुर पंचायत के मेंहदीपुर गांव की मतलू चौराई नामक एक 60 वर्षीय महिला की हत्या गांव के ही सकल टुडू ने डायन बताकर कर दी। उसे शक था कि महिला ने उसके बेटे को जादू टोना कर मार दिया है। इस हत्या का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि वृद्धा मतलू चौराई की हत्या के बाद सकल टुडू उसके कटे सर को लेकर 8 जुलाई को सुबह थाने पहुंच गया। इस दृश्य से सभी अवाक रह गए।

स्थानीय राधानगर पुलिस ने इसकी सूचना एसडीपीओ को दी और सकल टुडू की निशानदेही पर ही एसडीपीओ अरविंद कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने वहां मृत महिला का शव एक सुनसान जगह से बरामद किया। वृद्धा का शव बरामद करने के बाद पुलिस सकल टुडू के घर पहुंची, जहां लकड़ी के बक्से से उसके बेटे का शव बरामद किया। बता दें कि सकल टुडू का 25 वर्षीय बेटा साधिन टुडू बीमार था। उसे सर्दी-खांसी थी और जुलाई की शाम उसकी मौत हो गई।

उसकी मौत के बाद गांव में यह अफवाह फैल गई कि जादू-टोना कर मतलू चौराई ने उसकी जान ले ली। इसके बाद साधिन का पिता अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने के बजाय महिला की हत्या की बात मन में ठान ली। उसने 7 जुलाई की रात मतलू की गर्दन काट कर हत्या कर दी और कट हुआ सिर लेकर अगली सुबह राधानगर थाना पहुंच गया।

इस घटना से पहले 4 जुलाई 2020 को रांची जिले के लापुंग थाना क्षेत्र के चालगी केवट टोली के दो भाइयों हेमंत होरो औक बुधुआ होरो ने अपनी ही चाची 56 वर्षीया फुलमनी होरो की डायन होने के संदेह में हत्या कर दी। दोनों भाइयों के पिता बीमार रहते थे और उन्हें यह संदेह था कि उसकी चाची ने जादू कर दिया है, जिससे उसके पिता बीमार हैं।

24 मई 2020 को सिमडेगा के ठेठईटांगर थाना क्षेत्र में सैम्सन टेटे नामक युवक ने डायन-बिसाही के संदेह में कैतरिना कुल्लू नामक महिला की ब्लेड से गला काटकर हत्या कर दी थी। वह विगत 28 मई से जेल में बंद है। कहना न होगा कि झारखंड में डायन-बिसाही के शक में हत्या की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इसी साल मार्च महीने में रांची के कादोपानी थाना क्षेत्र के स्कूल टोली गांव का अनुरंजन कुल्लु ने अपने पड़ोस में रहने वाली महिला रोजालिया कुल्लु को डायन बताकर उसकी हत्या कर दी।

2018—19 की घटनाओं पर नजर डालें तो काफी चौकाने वाले आंकड़े सामने आते हैं। 2 मई 2018 को नामकुम प्रखंड हुआंगहातु पंचायत के सुकरीडीह गांव में लोहर सिंह मुंडा और उसकी पत्नी कैरी देवी की गांव के अखड़ा में ही ग्रामीणों ने डायन-बिसाही का आरोप लगा कर बड़ी बेरहमी से पीट-पीट कर मार डाला था। 1 सितंबर 2018 गुमला के सिसई थाना क्षेत्र की बोंडो पंचायत अरको महुआ टोली निवासी दंपती 65 वर्षीय शाहदेव उरांव और 60 वर्षीय बिगनी देवी की हत्या कर दी गई थी।

20 सितंबर 2018 को बुंडू में बुधनी देवी के डायन होने के शक में उसके भतीजे ने कुल्हाड़ी से मार कर हत्या कर दी थी। 12 नवंबर 2018 चाईबासा के चक्रधरपुर प्रखंड के कुरुलिया गांव के रंजीत प्रधान ने रिश्ते में उसकी सास लगने वाली 50 वर्षीय मनुप्यारी देवी को डायन बताकर धारदार हथियार से मार कर हत्या कर दी थी। 23 दिसंबर 2018 बारूडीह तमाड़ के रहनेवाले फलींद्र लोहरा ने इसी अंधविश्वास में आकर अपनी सास सुकरू देवी की टांगी से मारकर हत्या कर दी थी।

20 फरवरी 2019 को गुमला थाना से महज चार किलोमीटर दूर पुग्गू खोपाटोली गांव के ललित उरांव ने गांव की ही 65 वर्षीय बंधाइन उरांइन की पत्थर से कूंचकर हत्या कर दी थी। 21 फरवरी 2019 कोडरमा के मरकच्चो में दो महिलाओं को डायन-बिसाही के आरोप में ग्रामीणों ने जिंदा जलाने के लिए उन्हें खंभे से बांध कर मिट्टी तेल से नहला दिया। जैसे ही आग लगाने जा रहे थे कि तभी पुलिस पहुंच गई और दोनों बच गईं थीं।

26 मई 2019 सरायकेला जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के कृष्णापुर गांव में डायन के नाम पर नौ महिलाओं को घर से निकालकर पिटाई की गई और उनका सामूहिक रूप से जबरन मुंडन भी कर दिया गया था। 20 जुलाई 2019 की रात को गुमला जिले के नगर सिसकारी गांव में जादू-टोना और डायन होने के संदेह में चार बुजुर्ग आदिवासियों की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस गांव में केवल आदिवासी ही बसते हैं।

जिन क्षेत्रों की महिलाएं डायन-बिसाही के नाम पर सबसे ज्यादा हत्या की शिकार हुई हैं, उनमें रांची, खूंटी, सरायकेला, गुमला, देवघर, लोहरदगा और लातेहार शामिल है। वहीं सरायकेला में डुमरा एक ऐसा गांव है, जहां विधवा और बुजुर्ग महिलाओं को डायन बिसाही के नाम पर प्रताड़ित करना आम बात है। एसोसिएशन फॉर एडवोकेसी एंड लीगल इनीशिएटिव की एक रिपोर्ट बताती है कि झारखंड में डायन-बिसाही का शिकार होने वाली महिलाओं में 35 प्रतिशत आदिवासी और 34 प्रतिशत दलित हैं।

इन समाजों में ऐसी कुरीति क्या अशिक्षा के कारण है? इसके जवाब में आदिवासी मामलों की जानकार वंदना टेटे कहती हैं ”अंधविश्वास और अशिक्षा हर समाज में है, आदिवासी समाज पर ज्यादा फोकस इसलिए होता है कि सामान्य समझ में आदिवासी और दलित ही अशिक्षित होते हैं। जहां तक आदिवासी समाज में डायन-बिसाही के नाम पर की जा रही हत्याओं का मामला है, तो उसके कारणों में आदिवासी समाज के भीतर जबसे बाहरी तत्वों की घुसपैठ हुई है, इस तरह की हत्याओं में वृद्धि हुई है। जो आदिवासी समाज कभी एक समूह हुआ करता था, वह व्यक्तिगत होता जा रहा है। अजीविका के संसाधन जो आदिवासी समाज में सामूहिक हुआ करते हैं, अब व्यक्तिगत होने की ओर बढ़ रहे हैं, जिसका कारण है आदिवासी समाज में कारपोरेट दलालों की धीरे-धीरे घुसपैठ। वे आदिवासियों की जमीन की कीमत बताने लगे हैं, ताकि आने वाले दिनों में उनकी जमीन को बड़ी आसानी से कारपोरेट के हवाले किया जा सके।”

टेटे कहती हैं कि डायन-बिसाही के नाम पर महिलाओं की हो रही हत्या के पीछे खास कारण यह भी है कि महिलाएं जमीन के प्रति ज्यादा सजग होती हैं। इस तरह की घटनाओं से अन्य महिलाएं खामोश रहेंगी और घुसपैठिए आसानी से पुरुषों को कुछ लालच देकर अपने पाले में करके उनकी जमीन पर कब्जा कर लेगें। इसलिए डायन-बिसाही के नाम पर उन्हें ही टारगेट किया जा रहा है।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on October 4, 2020 12:06 pm

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