Sunday, December 5, 2021

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कर्पूरी ठाकुर की विरासत को आगे नहीं बढ़ा सकती लूट-झूठ की राजनीति

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बहुजन नायक कर्पूरी ठाकुर की विरासत को बुलंद करने और खेत-खेती-किसानी बचाने व खाद्य सुरक्षा  के लिए किसान आंदोलन की एकजुटता में खड़ा होने के आह्वान के साथ भागलपुर स्थित बिहपुर के ठाकुर टोला में आज उनकी जयंती समारोह का आयोजन हुआ।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ.विलक्षण रविदास ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर 1971 ई. में कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री बने तो सीमांत किसानों की जोतों से मालगुजारी खत्म कर दी। 1977 में जब दूसरी बार वे मुख्यमंत्री हुए तो पिछड़े वर्गों को सरकारी सेवाओं में आरक्षण देने सम्बन्धी मुंगेरीलाल कमीशन की सिफारिशें लागू कर दी। पूरे उत्तर भारत में इसी के साथ सामाजिक न्याय की राजनीति आगे बढ़ी। इसके कारण उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। लेकिन वे सामाजिक न्याय की अपनी लड़ाई से पीछे नहीं हटे और न ही उन्होंने इसके लिए कोई पश्चाताप किया। अपने कर्तव्य पर अडिग रह कर गरीबों , मजदूर -किसानों , महिलाओं और हाशिये के लोगों को मुख्यधारा में लाना ही उनकी राजनीति का मक़सद था। कर्पूरी ठाकुर ने ब्राह्मणवादी सवर्ण शक्तियों की गालियों व अपमान को झेलते हुए बहुजनों के लिए सामाजिक न्याय का रास्ता खोला। 

उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर की विरासत स्थापित राजनीतिक पार्टियां और स्थापित दलित-पिछड़े नेता आगे नहीं बढ़ा सकते। बहुजन समाज को उनकी विरासत को आगे बढ़ाने की जवाबदेही लेकर आगे बढ़ना होगा। बहुजन समाज को जगाने व एकजुट करने के साथ सड़क पर लड़ाई तेज करनी होगी। 

सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के रिंकु यादव ने कहा कि बिहार में भूमि सुधार आयोग और कॉमन स्कूल सिस्टम आयोग की सिफारिशें ठन्डे बस्ते में हैं। कर्पूरी ठाकुर के वारिस होने का दावा करने वाले नीतीश कुमार ने इन आयोगों की सिफारिशों को लागू करने से इंकार कर अपनी असलियत बता दी है। कर्पूरी ठाकुर की विरासत को आगे बढ़ाने का दावा करने वाली विपक्षी पार्टियां भी चुप हैं। 

उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर के वारिस भाजपा के साथ तो कतई नहीं हो सकते। लालू यादव-नीतीश कुमार जैसे नेताओं ने कर्पूरी ठाकुर की विरासत को आगे बढ़ाने का काम नहीं किया है। कर्पूरी ठाकुर की विरासत के मानदंडों पर बिहार में पिछड़े नेताओं के नेतृत्व में चलने वाली सरकारों का पिछले 30 साल का कार्यकाल सवालों के घेरे में आ जाता है।

सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के गौतम कुमार प्रीतम ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि बहुजन नायक कर्पूरी ठाकुर कहा करते थे- “भीख मांगने से कुछ नहीं मिलेगा, अधिकार नहीं मिलेंगे, सत्ता नहीं मिलेगी…अगर तुम कुछ पाना चाहते हो तो जागो। अगर तुम कुछ पाना चाहते हो तो उठो और आगे बढ़ो।” आज के दौर में बहुजनों को कर्पूरी ठाकुर के इस आह्वान के साथ संगठित होकर संघर्ष करना होगा, आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के द्वारा छेड़ी गई लड़ाई बहुजनों की लड़ाई है। कर्पूरी ठाकुर के वारिसों को इस लड़ाई को पूरी ताकत से आगे बढ़ाना होगा। जो आंदोलनरत किसानों के साथ नहीं है, वह कर्पूरी ठाकुर का वारिस नहीं हो सकता है।

फुले-अंबेडकर युवा मंच के अजय राम और सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के अंजनी ने कहा कि मृत्यु से कुछ दिन पहले उन्होंने जाति प्रथा से पीड़ित समाज के बंटे होने पर चिंता जाहिर की थी। उनका मानना था कि अलग-अलग जातियों के अलग-अलग संगठन बेकार हैं। वे उत्पीड़ित जातियों के संयुक्त संगठन और संगठित राजनीतिक ताकत को सामने लाने के पक्ष में थे। आज उनकी इस समझ के साथ उनके संघर्ष की विरासत को बुलंद करने की जरूरत है।

जयंती समारोह की अध्यक्षता दिलीप ठाकुर ने की। अन्य वक्ताओं में बहुजन स्टूडेन्ट्स यूनियन के अनुपम आशीष, गौरव पासवान, पांडव शर्मा, शुभम  ठाकुर, बिट्टू ठाकुर, कैलाश ठाकुर, मुन्ना राही, परमानन्द ठाकुर, सुशील सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए।

मौके पर प्रमुख रूप से सौरव पासवान, पूनम देवी, निर्भय शर्मा, चतुरी शर्मा, बलराम ठाकुर, मुसो शेख, शालीग्राम सिंह, जागो शर्मा, शिवा कुमार, वार्ड सदस्य मुन्ना साह, मनीष कुमार उर्फ टुन्ना मौजूद थे।

दूसरी तरफ भागलपुर में बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन के बैनर तले टीएमबीयू के स्नातकोत्तर पुरुष छात्रावास संख्या-4 में छात्रों ने बहुजन नायक कर्पूरी ठाकुर की जयन्ती पर उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। बहुजन नायक कर्पूरी ठाकुर के जीवन-संघर्ष पर चर्चा की और उनके विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

इस मौके पर बहुजन स्टूडेंट्स यूनियन के सोनम राव और अभिषेक आनंद ने कहा कि लूट व झूठ की राजनीति के खिलाफ कर्पूरी ठाकुर की ईमानदारी-सादगी व सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष की विरासत को आगे बढ़ाने की जरूरत है। कर्पूरी ठाकुर की विरासत को आगे बढ़ाकर ही बहुजन हित की राजनीति हो सकती है।

विभूति और राजेश रौशन ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर अपने समय में बहुजनों की एकता व दावेदारी, आत्मविश्वास व गरिमा के प्रतीक थे। हमें उनके विचार व संघर्ष से रौशनी ग्रहण कर आगे बढ़ना होगा।

चंदन पासवान और मिथिलेश ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने हाशिए के समाज के लिए शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का रास्ता खोला। आज कर्पूरी ठाकुर के वारिसों को सरकारी शिक्षा बचाने और नई शिक्षा नीति-2020 की वापसी के लिए लड़ना होगा।

मौके पर प्रभाकर, सूरज, बबलू, रुपेश, अंगद, गुलशन, सुशील, गौतम सहित कई अन्य लोग मौजूद थे।

(वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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