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कुछ और शख्सियतों की उठी प्रशांत के पक्ष में आवाज, कहा- जजों के सत्ता के करीब जाने से न्याय पालिका से भरोसा उठने का खतरा

भारत में मानव-अधिकारों और जनहित के लिए प्रख्यात वकील प्रशांत भूषण पर अवमानना की कार्रवाई को लेकर स्वराज अभियान ने बयान जारी किया है। बयान में कहा गया है कि उच्चतम न्यायलय द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर की जा रही यह कार्यवाही हम सबके लिए चिंताजनक है। वो काफी समय से मानव अधिकार, सामाजिक न्याय और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों की वकालत करते आ रहे हैं। बड़े-बड़े पूंजीपतियों से लेकर नेता और सरकारी अफसरों के भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों को उन्होंने उजागर किया है।

बयान में आगे कहा गया है कि न्यायपालिका की जवाबदेही जैसे संवेदनशील मामलों के साथ पारदर्शिता की मांग के लिए प्रशांत भूषण सालों से आवाज़ उठाकर इन ज्वलंत मुद्दों के प्रणेता बनकर उभरे हैं। मीडिया में यह रिपोर्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों ने प्रशांत भूषण द्वारा किए गए दो ट्वीट पर स्वतः संज्ञान लेकर और 11 साल पुरानी एक इंटरव्यू वाली अवमानना केस को फिर शुरू किया गया है।

स्वराज अभियान ने बयान में कहा है कि वर्ष 2009 वाली अवमानना की कार्रवाई प्रशांत भूषण द्वारा एक पत्रिका को दिए साक्षात्कार पर आधारित है। इस मामले में फिर तीन हलफनामे के जरिए सुबूत सहित सुप्रीम कोर्ट में जमा किया जा चुका है।

इन हलफनामों में कई घटनाओं का जिक्र है जो प्रशांत भूषण के बयान का आधार हैं। जवाब दायर करने के बाद कोर्ट ने सालों पहले तब जांचने या परखने का नहीं सोचा और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था।

दुनिया भर की न्याय प्रणाली में यह मान्यता है कि न्यायधीशों का आचरण हर वक्त निडर, निस्वार्थ और निष्पक्ष रहना चाहिए जो सिर्फ और सिर्फ न्याय को बढ़ावा देने लिए बना है। जहां कहीं भी ये पाया गया है कि ‘जज’ खुद सत्ता भोग के करीब है या राज करने वालों से रिश्ता रखता है वहां इस गैर जिम्मेदारी के वजह से जनता का न्यायपालिका पर से भरोसा उठ जाता है।

इससे पूरे न्यायिक प्रणाली से मोहभंग होने का भी खतरा होता है। लोकतांत्रिक ढांचे का महत्व इसीलिए भी होता है, क्योंकि वो कानून के राज (Rule of Law) पर निर्भर रहता है और कानून की रक्षा करने वालों से ये उम्मीद की जाती है कि उनका आचरण संविधान के वाक्यों के साथ साथ उसकी मूल भावना और आत्मा से निर्धारित हो।

इसीलिए ऐसे व्यक्ति को जो लगातार न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए और न्यायपालिका के माध्यम से ही आम जन मानस को राहत के साथ-साथ उनके कल्याण के लिए कई कदम उठाए, उसके किसी बयान पर उसे दंडित करना किसी भी पैमाने से उचित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों को तो ऐसी प्रथा स्थापित करनी चाहिए, जिसमें वो जनता के द्वारा अपनी कार्यशैली पर चर्चा और आलोचना का स्वागत करे और आपराधिक अवमानना या बदला लेने जैसी कार्रवाई की कोई जगह न हो। आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) जैसे प्रावधानों को अमरीका और यूरोपीय देशों जैसे कई लोकतंत्र ने निर्जीव बना दिया है।

भारत में कई कानूनविदों ने ये रेखांकित किया है कि न्यायपालिका को आलोचना दबाने के लिए अवमानना जैसी कार्रवाई का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

स्वर्गीय विनोद बोबडे (वरिष्ठ अधिवक्ता) ने अपने लेख ‘Scandal and Scandalising’ [( 2003 ) 8 SCC Jour 32] में लिखा है, “हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते, जिसमें नागरिक इस भय में जीने लगें कि वे जजों और न्यायपालिका की आलोचना नहीं कर सकते, वरना उन पर अवमानना जैसी कार्रवाई चला दी जाएगी।”

न्याय और न्यायिक मूल्यों के लिए, न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट की गरिमा बनाए रखने के लिए हम माननीय न्यायधीशों के साथ माननीय मुख्य न्यायधीश से अनुरोध करते हैं कि वे प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना की यह कार्रवाई शुरू करने के फैसले को फिर से परखें और वापस लें। प्रशांत भूषण स्वयं लोकतांत्रिक भारत में वकालत जैसे पेशे में एक आदर्श हैं। हम उम्मीद करते हैं कि भारतीय न्यायपालिका आत्म परीक्षण कर किसी ऐसे जागरूक नागरिक और प्रखर वकील को उसके बयान और धारणा सार्वजनिक करने के लिए चुप कराने की कोशिश नहीं करेगी।

प्रशांत भूषण के समर्थन में देश और दुनिया भर से उठ रही है आवाज़, 185 लोगों ने सार्वजनिक बयान किया जारी
• फिनलैंड के पूर्व विदेश मंत्री और यूरोपीय संसद के सदस्य समेत नेपाल से लेकर अमरीका तक 54 अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों ने सार्वजनिक बयान जारी किया।

• गाँधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, पर्यावरणविद् रवि चोपड़ा, मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित संदीप पांडेय, स्वामी अग्निवेश, डॉ. सुनीलम और प्रोफेसर आनंद कुमार समेत भारत के 131 सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, पर्यावरणविद् और सम्मानित नागरिकों ने भी प्रशांत भूषण का समर्थन किया है।

• सबने उम्मीद जताई है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अवमानना के मामले में भारतीय संविधान की भावना के अनुरूप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों की जीत होगी।

• प्रशांत भूषण द्वारा जून के महीने में किए गए दो ट्वीट पर उच्चतम न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया है। साथ ही अवमानना से ही संबंधित 2009 के एक पुराने मामले पर भी आठ साल बाद सुनवाई शुरू कर दी गई है।

• अब तक सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई सेवानिवृत न्यायाधीशों ने भी प्रशांत भूषण के समर्थन में बयान जारी किया है।

• सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय समेत 16 सिविल सोसायटी सदस्यों ने माननीय उच्चतम न्यायलय में इस अवमानना के मामले में हस्तक्षेप करने का आवेदन भी दिया था, जिसको अदालत के रजिस्ट्री ने ठुकरा दिया।

• इसके अलावा एक अन्य याचिका में अरुण शौरी, एन राम और प्रशांत भूषण ने ‘अदालत की अवमानना’ से सम्बंधित प्रावधान को चुनौती दी है, जिसकी सुनवाई 10 अगस्त को मुक़र्रर की गई है।


International Signatories: [54]

  1. Heidi Hautala, Vice President of the European Parliament
  2. Erkki Tuomioja, MP & Ex. Foreign Minister, Finland
  3. Satu Hassi, M.P., Finland
  4. Paul Joseph, Sociologist, Tufts University, USA
  5. Joseph Weidenholzer, Ex. Member, European Parliament, Austria
  6. Jan Art Scholte, Political scientist, Leiden Univ., Netherlands
  7. Folke Sundman, Global Affairs Committee & Social Democratic Party, Finland.
  8. Uday Dandvate, Architect and Human Rights Activist, USA
  9. Marko Ulvilla, Political Scientist, Finland
  10. Thomas Wallgreen, Co-Founder, Vasudhaiv Kutumbakam, Finland
  11. Kai Varra, Social Eco community Activist, Finland
  12. Lal Singh, Scientist, Australia
  13. Daphne Wysham, Sustainable Energy & Economy Network
  14. Satyanarayan Mohapatra, MIT
  15. Suhail Purkar
  16. Rajeev Soneja, Arlington, MA
  17. Manisha Sharma, Arlington, MA
  18. Abha Sur, Lecturer, MIT
  19. Uma Murugan, Sommerville, MA
  20. Payal Kumar, Brookline, MA
  21. Dr. Nila Vora, past President of India Development Service, Chicago, IL. USA
  22. Jai Sen, independent Researcher, Editor, Ottawa, Canada
  23. Monisha Rao, IFA (India Friends Association), Camarillo, CA, USA
  24. Prof. Jan Peterse, Global Studies expert, Univ. of California, Santa Barbara, USA
  25. Prof. Satyajit Singh, Political scientist, Univ. of California, Santa Barbara, USA
  26. Prithvi Sharma MD, Gen. Secy., India Friends Association, CA, USA.
  27. Abhay Bhushan, Distinguished Alumnus, IIT-Kanpur (Class of 1965), Palo Alto, USA.
  28. Deepak Agrawal, Former Director – Process Technologies, Jacobs Engineering, PA, USA.
  29. D.C. Agrawal, Distinguished Alumnus, IIT-Bombay (Class of 1969), Princeton, USA.
  30. Dr. Yogesh C. Agrawal, President, Sequoia Scientific, Seattle, USA.
  31. Kailash Narayan, Lifeline International, Agoura Hills, CA, USA.
  32. Dr. Sivaram Chelluri, W. Windsor, NJ, USA.
  33. Kumar Shah, New York, NY, USA.
  34. Biren Shah, Princeton, USA.
  35. Chelluri Sastri, Halifax, NS, Canada.
  36. Tord Bjork, Coordinator, EU Committee, Friends of the Earth, Sweden.
  37. Ms. Reshma Nigam, President, Indians for Collective Action (ICA), Saratoga, CA, USA
  38. Dr. Prithviraj Sharma, Gen. Secretary, India Friends Association(IFA) Camarillo, CA, USA
  39. Prof. Jaspal Singh, South Asia Centre (SAC), Cambridge, MA, USA
  40. Shri Bhupen Mehta, Chairman, ICA partnership, Cupatino, CA, USA
  41. Shri Somnath, Boston, MA, USA
  42. Hardeep Kaur Singh, South Asia Centre (SAC), Cambridge, MA, USA
  43. Hari Rokka, Member of Constituent Assembly(2008-11), Nepal
  44. Prof. Krishna Khanal, Political Scientist and Former Advisor to Prime Minister of Nepal
  45. Prof. Lok Raj Baral, Political Scientist&Former Ambassador of Nepal to India
  46. Prof Kapil Shrestha, Former Member of Nepal Human Rights Commission
  47. Sushil Pyakurel Former Political Advisor to President/member of Nepal Human Rights
  48. Vijay Kant Karna, Former Nepali Ambassador to Denmark
  49. Kanak Dixit, Editor of Himal South Asia
  50. Dinesh Tripathi, Senior Advocate of Nepal
  51. Charan Prasain, Senior Human Rights Activist (Nepal)
  52. Dr. Indra Kumari Adhikari, Former Deputy Executive Director of Institute of Foreign Affairs
  53. Dr. Uddhab Pyakurel, Faculty of Political Sociology & Founder of South Asian Dialogues on Ecological Democracy
  54. Prof. Frank Welz, Former President, European Sociological Society.


Indian Signatories: [131]

  1. Ravi Nair, South Asia Human Rights Documentation Centre, New Delhi.
  2. Swami Agnivesh, Bandhua Mukti Morcha
  3. Padmabhushan T. K. Oommen, Emeritus Professor, JNU, New Delhi
  4. Sandeep Pandey, Magsaysay award, V.P., Socialist Party of India, Lucknow
  5. Arundhati, AASHA, Lucknow
  6. Kumar Prashant, President, Gandhi Peace Foundation, New Delhi
  7. Prof. Jagmohan Singh, Gen. Secretary, Association for Democratic Rights
  8. Ramashankar Singh, Chancellor, I.M.T. University, Gwalior
  9. Prof. Pramod Yadav, Ex. Dean, School of Life Sciences, JNU, New Delhi
  10. George Mathew, Chairman, Institute of Social Sciences, New Delhi
  11. K. Vijay Rao, Gandhi Memorial Trust, Warangal
  12. Anuradha Chenoy, Former Dean, School of International Relations, JNU.
  13. Ramesh Dixit, Professor of Political science (Retd.), Lucknow Unviersity.
  14. Vandna Mishra, Author, Lucknow
  15. Kamal Mitra Chenoy, Former President, JNU Teachers Association, N. Delhi
  16. Arvinder Ansari, Sociologist, Jamia Milia University, N. Delhi
  17. Dr. Sunilam, National coordination of Kisan organisations, Gwalior
  18. Arun Kumar, Economist, New Delhi
  19. Anil Thakur, Nagarik Manch, New Delhi
  20. Vijay Pratap, Vasudhaiv Kutumbakam, New Delhi
  21. Madhuresh, National Alliance of Peoples Movements, N. Delhi
  22. Anand Kumar, Former President, Federation of CU Teachers Association. 
  23. B.R. Patil (Former Speaker, Karnataka Legislative Assembly) 
  24. Adv Irfan Khan (Madhya Pradesh High Court, Jabalpur)
  25. Kalpana Shivanna (President, Kannada Sahitya Parishattu)
  26. N Manu Chakravarthy (The National College, Bangalore)
  27. Ramanna Kodihosahalli (Former President, Kannada Conflict Committee)
  28. Appasaheb Yaranal (President, Karnataka Social Science Forum)
  29. GKC Reddy (Social Activist, Bangalore)
  30. Alibaba (Rashtra Seva Dal, Karnataka)
  31. Laxman Sariyala (Dalit Shoshan Mukti Manch, Jaipur)
  32. Dr. Rajiv Gupta (Retd. Professor, Jaipur)
  33. Gajendra Kumar Verma (Loktantrashala, Rajsamand)
  34. Pushpa Saini (Mahila Punarvas Samuh Samiti, Jaipur)
  35. Nand Kishor Shukla (Jt Secretary, Akhil Bhartiya Kisan Sabha)
  36. B.L. Netam (Convener, Adinivasi Gan Parishad)
  37. Santosh Soni (District president, Sonia Brigade, Baitul, MP)
  38. Somnath Tripathi (Vice President, Swaraj India, Varanasi)
  39. Dr. Rajendra Sharma (Azadi Bachao Andolan)
  40. Girija Pathak (AIPF)
  41. Manish Kumar (Samajvadi Lok Manch)
  42. Nita Mahadev (Gujarat Lok Samiti, Ahmedabad)
  43. Ramswarup (Socialist party, India)
  44. Adv Gangaram Patidar (Mandsaur, MP)
  45. Cavery Bopaiah (Bangalore, Swaraj Abhiyan)
  46. Srikanta Murthy (Karnataka State Congress Committee)
  47. Rajesh Tameshwari (Rashtra Seva Dal, MP)
  48. Virendra Vidrohi  (INSAF)
  49. Moulana Hanif (Mewat)
  50. Ananth (Lokmuti, Jharsugoda, Odisha)
  51. Raj Kumar Sinha ( Jabalpur, Madhya Pradesh)
  52. Prof. Om Jangu (Hanumangardh, Rajasthan)
  53. Samir Putatunda (AIKSCC West Bengal)
  54. Madhusudhan (Convener, Jan Jagran Abhiyan)
  55. Deepak (We Embrace)
  56. Amreen Khan (Manj Subha Foundation)
  57. Himmat Seth (Samta Sanvaad)
  58. Vijay Swamy (Janwadi Lekhak Sangh, Jaipur)
  59. Tulsi Sharma
  60. Atul Kumar
  61. Prof. Shashi Shekhar Singh (Samajwadi Shikshak Sangh, Delhi University)
  62. Neeraj Kumar ( National President, Socialist Yuvjan Sabha)
  63. Mahesh Saini Bharala (Sikar, Rajasthan)
  64. Shankarlal Chaudhary (AIPF, Udaipur)
  65. N G Ramachandra ( Samata Sagathane, Tumakuru)
  66. Ravi Chopra ( Veteran Environmentalist)
  67. Rajiv Lochan Shah ( President, Uttrakhand Lok Vahini)
  68. Uma Bhatt ( Chief Editor, Uttra Mahila Patrika)
  69. Bharat Jhunjhunwala (Environmentalist)

    -Uttrakhand Civil Society-
  70. Virendra Painuli
  71. Raja Bahuguna
  72. Gita Gairola
  73. Trilochan Bhatt
  74. Indresh Maikhuri
  75. Rajesh Saklani
  76. Pradeep Sati
  77. Rajesh Bahuguna
  78. Chandan Ghugtiyal
  79. Gaurav Mishra
  80. Basanti Pathak
  81. Gitika
  82. Rizwan Ali
  83. Sushil Saini
  84. Nirmala Bisht
  85. Bhargav Chandola
  86. Chandra Bhandari
  87. Sarojini Raturi
  88. Padma Gupta
  89. Shankar Singh Bhatia
  90. Kamla Pant
  91. Shakuntla Gusain
  92. NN Pandey
  93. Rakesh Agrawal
  94. Shankar Gopalan
  95. PC Tiwari
  96. Adv Syed Gulfam
  97. JS Bisht
  98. Nirupama Seth
  99. Arun Srivastava
  100. E.V. KumarImran Rana
  101. D.K Joshi
  102. Malika Virdi
  103. B.R. Kanswal
  104. Dr. N.S. Bhatnagar
  105. Bhopal Choudhary
  106. Kailash
  107. Ila Pant
  108. Naveen Pant
  109. Pushkar Raj
  110. Dunu Roy, Director, Hazard Centre, New Delhi.
  111. Dr. Bindu T. Desai, Neurologist, Mumbai.
  112. Dipak Dholakia, Convenor, Indian Community Activists Network (ICAN).
  113. Dr.Subhash Mohapatra, Convenor, National Campaign for Ending Corporate Abuse, Odisha.
  114. Pradip Chatterjee, President Dakshinabanga Matsyajibi Forum (DMF), Kolkata.
  115. Prafulla Samantara, Environmental Activist, 2017 Goldman Prize, Odisha.
  116. Sagar Rabari, President, Khedut Ekta Manch, Ahmedabad, Gujarat.
  117. Soumen Ray, ICAN-India, Kolkata.
  118. Faisal Khan, Khudai Khidmatgar, New Delhi.
  119. Nootan Malvi, Social Activist, Wardha.
  120. Sanjoy Hazarika, Senior Journalist, New Delhi.
  121. James Herenj, Convenor, Jharkhand NREGA Watch.
  122. Dr. Rajesh Thadani, Managing Director, Azura Enterprises Pvt Ltd, New Delhi.
  123. Rabin Chakraborty, Retd. Teacher, Calcutta University, Kolkata.
  124. Dr. Malavika Chauhan, Ecologist, Dehradun.
  125. Pramod Yadava, Professor, Department of Biological Sciences, IISER, Odisha.
  126. K.V. Rao
  127. Rajesh Ramakrishnan, ICAN, New Delhi. 
  128. Dr. A.K. Arun, Editor, Yuva Sandesh
  129. Dr. D. K. Giri, Centre For Democratic Socialism
  130. Prof. Rakesh Sinha, IIT BHU, Swaraj India.
  131. Dr. Santprakash Singh, Delhi University.

This post was last modified on August 8, 2020 9:14 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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