Wednesday, December 7, 2022

film

क्या उमर खालिद के खिलाफ दाखिल चार्जशीट फ़िल्मी स्क्रिप्ट है!

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की साजिश के मामले में गिरफ्तार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व नेता उमर खालिद ने शुक्रवार को अदालत से कहा कि उनके खिलाफ आरोपपत्र किसी वेब सीरीज या टीवी समाचार की पटकथा...

हमारे समय का डरावना यथार्थ पेश करती है फिल्म ‘200: हल्ला हो’

दलितों के शोषण और उसके प्रतिकार पर बनी ‘200: हल्ला हो’ झकझोरने वाली फ़िल्म है।  2004 में नागपुर में दलित महिलाओं के एक समूह ने बलात्कार और यौन शोषण के एक आरोपी अक्कू यादव की भरी अदालत में हत्या...

भारतीय सिनेमा और दलित पहचान : भारत जैसे जातिग्रस्त समाज के लिए ज़रूरी है `पेरारियात्तवर`

(ऐतिहासिक तौर पर भारतीय सिनेमा ने जहाँ फ़िल्मों के निर्माण में दलितों के श्रम का शोषण किया है वहीं उनकी कहानियों को मिटाया और हड़पा है। यह सब अकस्मात न था। परदे पर जब उनकी कहानियाँ दिखलाई जातीं तो...

21 सिख बनाम 10000 पठान यानी सारागढ़ी युद्ध की क्या है हकीकत?

अभी पिछले दिनों केसरी (Kesari) के नाम से एक नई फिल्म रिलीज़ हुई है। ये एक ऐतिहासिक फ़िल्म है। इसमें सारागढ़ी की मशहूर जंग दिखाई गई है। इसमें  बताया गया है कि केवल 21 सिखों ने 10000 पठानों का...

सुरेखा सीकरी; अभिनय के लिए 70 एमएम का पर्दा भी छोटा था

दुनिया के लिए 'सुरेखा सीकरी' , पर हमारे लिए 'फ़याज़ी, नहीं 'फैज्जी'। जब सब तरफ़ से तुम्हारे इस जहां से रुख़्सत हो जाने की आवाज़ें आ रही हैं, जुलाई की उमस से भरी गर्मी में पेड़ भी शिथिल खड़े...

पुण्यतिथि पर विशेष: एमएफ हुसैन यानी कैनवास का अलहदा बादशाह

एमएफ हुसैन के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर मकबूल फिदा हुसैन ऐसे मुसव्विर हुए हैं, जिनकी मुसव्विरी के फ़न के चर्चे आज भी आम हैं। दुनिया से रुखसत हुए उन्हें एक दहाई होने को आई, मगर उनकी यादें...

राजेन्द्र कृष्ण की जयंती: गीतकार जिसने फिल्मों की स्क्रिप्ट और संवाद भी लिखे

फिल्मी दुनिया में राजेन्द्र कृष्ण वे गीतकार हैं, जिन्होंने हिंदी फिल्मों की कहानी, स्क्रिप्ट और संवाद भी लिखे। सभी फील्ड में वे कामयाब रहे। लेकिन राजेन्द्र कृष्ण के चाहने वालों में उनकी पहचान गीतकार की ही है। चार दशक...

जन्मशती पर विशेष: साहिर न होते तो फ़ासिज़्म और क़रीब होता

(साहिर, 8 मार्च 1921- 28 अक्तूबर 1980; जन्म-शती साल)    साहिर लुधियानवी की बेशुमार लोकप्रियता से रश्क और रंजिश रखने वाली अदीबों की दुनिया में एक बहस उछाली जाती रही है कि साहिर रोमेंटिक शाइर हैं या पॉलिटिकल। यह भी...

‘द लिस्ट : मीडिया ब्लडबाथ इन कोविड टाइम्स’ यानी पत्रकारों पर कोरोना कहर की जिंदा दास्तान

ऐसा माना जाता है कि पत्रकारिता एवं फिल्में समाज का आईना होती हैं। समाज में जो कुछ हो रहा होता है उसे मुकम्मल तौर पर समाज के सामने लाने की जिम्मेदारी पत्रकारिता की ही होती है। फिल्मों को कुछ...

उस रात हम वीरा साथीदार के साथ थे

वीरा साथीदार को हम में से बहुतों की तरह मैंने पहली बार चैतन्य तम्हाणे निर्देशित मराठी फ़िल्म `कोर्ट` में ही देखा। इस फ़िल्म को ऑस्कर के लिए बेस्ट फॉरेन फिल्म कैटेगरी के लिए नामांकित किया गया था। इसके पीछे...
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क्यों ज़रूरी है शाहीन बाग़ पर लिखी इस किताब को पढ़ना?

पत्रकार व लेखक भाषा सिंह की किताब ‘शाहीन बाग़: लोकतंत्र की नई करवट’, को पढ़ते हुए मेरे ज़हन में...
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