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जन सूचना पर सुप्रीम कोर्ट की खतरनाक चिंता कर सकती है आरटीआई की धार कुंद

उच्चतम न्यायालय को लगता है कि सभी को सभी सूचनाएं पाने का अधिकार सीमित होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सूचना का कानून (आरटीआई) मामले पर अहम टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया है कि क्या आरटीआई एक्ट किसी का व्यवसाय भी हो सकता है? ऐसे लोग, जिनका सूचना के विषय से कोई लेना-देना नहीं है, वे सूचना के लिए आरटीआई डाल रहे हैं।

कानून का उद्देश्य था कि लोगों को वह सूचनाएं मिलें, जिनसे वे प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन अब हर कोई आरटीआई लगा रहा है, चाहे उसे अधिकार हो या नहीं। अधिकार का कोई महत्व नहीं रह गया है। अदालत ने संकेत दिया कि वह इस मामले में दिशा-निर्देश बना सकता है।

अदालत ने कहा कि हम देख रहे हैं कि लोग अपने लेटर हेड पर खुद को आईटीआई एक्सपर्ट लिख रहे हैं और ऐसे लोग जिनका कोई लेना-देना नहीं है तथा जिनका विषय से कोई संबंध नहीं है वह सूचनाओं के लिए याचिकाएं लगा रहे हैं। देखा जाए तो ये बुनियादी रूप से आईपीसी की धमकी (धारा 506) है। यानी धमकी देना है।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा कि हालत ये हो गई है कि अब कोई फैसला नहीं लेना चाहता, क्योंकि उसे डर है कि उसके खिलाफ आर्टीआई लगा दी जाएगी। न्यायमूर्ति बोबडे ने कहा कि मुंबई में मुझे लोगों ने बताया कि सूचना कानून के डर के कारण मंत्रालय में काम को वास्तिवक रूप से लकवा मार गया है।

इस बात पर अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि जो भ्रष्ट हैं, उन्हें ही डरने की जरूरत है, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हर कोई व्यक्ति गैर कानूनी काम नहीं कर रहा है। हम कानून के या सूचनाओं के प्रवाह के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन क्या ये इस तरह से जारी रह सकता है? ये अप्रतिबंधित अधिकार, जिसमें कोई भी किसी से कुछ भी मांग सकता है? यहां तक कि अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ अजिर्यां लगाई जा रही हैं। लोग आपसी खुन्नस निकाल रहे हैं। इस मामले में कुछ दिशा-निर्देंश होने ही चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से लोगों में बेचैनी है। अगर अदालत इस बारे में कोई दिशा-निर्देश जारी करता है तो निश्चित ही इससे आरटीआई की धार कुंद होगी और इसमें भ्रष्ट तंत्र संरक्षण पाने का अधिकारी बन जाएगा। सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ बहुत सारे मामले इसलिए सामने आ सके हैं, क्योंकि लोगों ने आरटीआई के तहत सूचनाएं मांगी थी।

आरटीआई में साफ कहा गया है कि सूचना मांगते वक्त यह नहीं पूछा जा सकता है कि आप यह सूचना क्यों मांग रहे हैं, लेकिन चीफ जस्टिस की टिप्पणी है कि कोई भी कोई सूचना यूं ही मांग ले रहा है, जो उचित नहीं है।

This post was last modified on December 17, 2019 2:59 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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