विशेष रिपोर्ट: बिहार की पूरी जनता के लिए एनआरसी है चुनाव आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानि एसआईआर

पटना। बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू किया गया विशेष गहन पुनरीक्षण… Read More

‘हमें अधिक साहसी और निडर न्यायाधीशों की आवश्यकता है, तभी संविधान जीवित रहेगा’: न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां

महाराष्ट्र और गोवा बार काउंसिल द्वारा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय एस. ओका के सम्मान… Read More

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति छात्र आंदोलन के बाद कुर्सी बचाने की फिराक में

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में छात्रों का आंदोलन कुलपति को हटाने, छात्रों पर हुई… Read More

संयुक्त राष्ट्र संघ पूरी तरह कमजोर हो गया है, विश्व शांति के लिए गंभीर नए प्रयासों की आवश्यकता

दुनिया में विश्व शांति के लिए अनेक प्रयास किए गए, लेकिन उन्हें सीमित सफलता ही मिली। टिकाऊ… Read More

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग पर विश्वास का संकट 

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेएसएसएससी) द्वारा रविवार, 29 जून को आयोजित उत्तराखंड सम्मिलित राज्य सिविल/प्रवर अधीनस्थ सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा – 2025 में मात्र 50.47 प्रतिशत अभ्यर्थी ही परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे यानी लगभग  49.53  प्रतिशत या 50,000 से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा में भाग नहीं लिया, जबकि उन्होंने इसके लिए आवेदन अवश्य किया था पिछले वर्ष 2024 में इसी परीक्षा में 47.67 प्रतिशत ही परीक्षार्थी उपस्थित हुए थे,जबकि आवेदकों की कुल संख्या करीब 1.5 लाख थी।इस बार आवेदन संख्या घटी है 1,01,964 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया लेकिन अनुपस्थित रहने वालों  की संख्या अब भी लगभग आधी  बनी हुई है। सरकार और आयोग इसे “बारिश के बावजूद भागीदारी में वृद्धि” कहकर अपनी पीठ खुद ठोक रहे हैं।लेकिन इस सतही संतोष के  पीछे कुछ गहरे और चिंताजनक सवाल छिपे हैं। आखिर,  बेरोजगारी के … Read More

बिहार में मतदाताओं का गहन पुनरीक्षण नागरिक अधिकार से वंचित करने की कोशिश- एआईपीएफ 

लखनऊ। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव के ठीक पहले मतदाताओं का कराया जा रहा विशेष… Read More

संविधान के प्रिएंबल में ‘सेक्युलर’ शब्द पर ये ‘तूफान’ क्यों? 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के उप-प्रमुख या सर-कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले संघ-भाजपा परिवार के पहले नेता नहीं हैं,… Read More

नागरिक या सत्ता के ख़िलाफ़ युद्ध?: वैश्विक लोकतांत्रिक देशों के लिए ज़िम्मेदारी तय करने का समय

आज के परस्पर जुड़े विश्व में मौत चाहे भूख, ग़रीबी, गोलियों या बमों से हो — उसे… Read More