देशभक्ति: जज़्बा या सियासी औज़ार?
देशभक्ति एक ऐसा लफ़्ज़ है, जिसे सियासतदानों ने अपनी सहूलियत के मुताबिक़ मनचाहा शेप देने की कोशिश की है। यह एक एहसास, एक जज़्बा और [more…]
देशभक्ति एक ऐसा लफ़्ज़ है, जिसे सियासतदानों ने अपनी सहूलियत के मुताबिक़ मनचाहा शेप देने की कोशिश की है। यह एक एहसास, एक जज़्बा और [more…]
गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर का व्यक्तित्व अंतरराष्ट्रीय था। बंगाल के कुछ बेहद सम्पन्न लोगों में उनका परिवार आता था। उनके बड़े भाई सत्येंद्र नाथ टैगोर, [more…]
उनकी पहचान कपड़ों से नहीं उनके विचारों से होती है। वे उदारवाद का मुखौटा लगाकर आपके आसपास मंडराते हैं। वे बढ़-चढ़कर देश के विकास की [more…]