Wednesday, October 27, 2021

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Tali

बेरोजगार छात्र-युवाओं के दमन से बाज आए सरकार!

संवेदनहीनता और क्रूरता की पराकाष्ठा है कि प्रतियोगी छात्र/छात्राएं तथा बेरोजगार युवक/युवतियां जब रोजगार की मांग कर रहे हैं, सात-सात साल से अटकी पड़ी परीक्षाओं को अंजाम तक पहुंचाने की मांग कर रहे हैं, तो केंद्र व राज्य सरकारें...

नौजवानों की थालियों से सरकार की पेशानी पर बल, रेलमंत्री ने किया परीक्षा की तारीखों का एलान

आख़िर रेल मंत्री पीयूष गोयल को अपने ट्विटर हैंडल पर रेलवे भर्ती की परीक्षाओं की तारीख़ का एलान करना ही पड़ गया। रेलवे की भर्ती परीक्षा देने वाले करोड़ों नौजवान न जाने कब से उनके ट्विटर हैंडल पर गुहार...

रोजगार की मांग को लेकर देश भर में बजी ताली और थाली

प्रयागराज। राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत इलाहाबाद में विभिन्न संगठनों से जुड़े छात्रों और नौजवानों ने आज सुभाष चौराहा सिविल लाइंस में थाली बजाकर बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ प्रतिवाद जताया। युवाओं ने कहा कि एसएससी सीजीएल 2018, एसएससी सीएचएसएल 2018, एसएससी...

कोरोना पर केंद्र: अक्षमता का शिखर और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा

सत्ता चरण वंदना में जुटी मीडिया अब तलक मोदी डुगडुगी को जोर-जोर से बजाने में पूर्ण मनोयोग से जुटी है और इधर भारत कोरोना वायरस कोविड-19 संक्रमण के संक्रमित मरीजों के मामले में एक-एक करके सभी देशों को पीछे...

प्रतीकों से नहीं सैनिक और संसाधनों से जीते जाते हैं युद्ध

कल सुबह 9 बजे प्रधानमंत्री जी देश के सामने एक वीडियो सन्देश द्वारा रूबरू हुए। लोग उक्त सन्देश को सुनना चाह रहे थे। बात जब पीएम की हो तो उम्मीद भी बेहतर ही सुनने की होती है। पर प्रधानमंत्री...

ताली, थाली, घण्टी और शंखनाद का मनोविज्ञान

बात सिर्फ़ अंधभक्तों की ही नहीं है। अंधभक्तों की आंखों पर तो पट्टियां बंधी ही हुई हैं लेकिन आज राष्ट्रपति, डॉक्टर्स, इंजीनियर, प्रोफ़ेसर्स, मंत्री, संतरी, टीचर्स, और अन्य पढ़े-लिखे तबक़े सभी को आज थाली, ताली, घण्टी और शंख बजाते...

जनता कर्फ्यू बनाम कोरोना महोत्सव

यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा, शास्त्रं तस्य करोति किं। लोचनाभ्याम् विहिनस्य दर्पण: किं करिष्यति।। अर्थात जिसके पास स्वयं की बुद्धि नहीं है, उसका शास्त्र भी कल्याण नहीं कर सकते। जैसे नेत्रहीन व्यक्ति के लिए दर्पण किसी काम का नहीं होता। आज...

सामूहिक मौत के साये में विजय दुंदुभि!

आरएसएस ने विश्व हिन्दू परिषद के नाम से 1989 में रामजन्मभूमि अभियान की आक्रामक शुरुआत की थी। हम आठवीं से आगे की पढ़ाई के लिए गाँव से शहर (मुज़फ़्फ़रनगर) पहुंच चुके थे। इस तरह हम होश संभालते ही हिन्दुस्तान...

ताली-थाली बज गई, अब सरकार अपना दायित्व निभाए!

अभी थोड़ी देर पहले जब ताली, थाली, शंख की आवाजें रुकी तो उप्र के एक डॉक्टर मित्र का फोन आया। मुझसे कोरोना की समस्या पर बात कर रहे थे। उन्हें एक दूरस्थ सेंटर में कोरोना का इंचार्ज बनाया गया...
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ढह गया गांधीवाद का सबसे मजबूत स्तंभ, नहीं रहे सुब्बाराव

प्रख्यात गांधीवादी विचारक और सामाजिक कार्यकर्ता एसएन सुब्बाराव का आज निधन हो गया। वे उन बिरले गांधीवादियों में से...
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