Monday, August 8, 2022

brahmin

तन्मय के तीर

कभी मिले ‘मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए जैश्रीराम’ बीएसपी का अहम नारा था। आज वह पार्टी जय भीम की जगह जैश्रीराम के नारे को तरजीह दे रही है। उसने यूपी में घोषणा की है कि सरकार में आने पर...

ब्राह्मणवाद का विरोध करने पर कन्नड़ अभिनेता से 4 घंटे पुलिस पूछताछ

कन्नड़ अभिनेता और एक्टिविस्ट चेतन कुमार से आज शुक्रवार को बेंगलुरू पुलिस ने लगभग 4 घंटे तक पूछताछ किया है। इसकी जानकारी खुद चेतन कुमार ने अपने ट्विटर एकाउंट पर साझा किया है।   गौरतलब है कि ब्राह्मणवाद के ख़िलाफ़ बयान...

तमिलनाडु में 100 दिन में 200 गैर ब्राह्मण पुजारियों की नियुक्ति करेगी स्टालिन सरकार

तमिलनाडु की 38 दिन पुरानी एमके स्टालिन सरकार ने 100 दिन में 200 गैर-ब्राह्मण पुजारियों की नियुक्ति की घोषणा की है। कुछ दिनों में 70-100 गैर-ब्राह्मण पुजारियों की पहली लिस्ट जारी होगी। इसके लिये जल्द ही 100 दिन का “शैव...

जय श्रीराम…ब्राह्मण एकता जिंदाबाद के नारों से गूंजी मुगलसराय कोतवाली, मूकदर्शक बनी रही पुलिस

वाराणसी। चंदौली जिले की मुगलसराय कोतवाली बृहस्पतिवार को ब्राह्मणों के जातिगत नारे से गूंज उठी। ब्राह्मणों ने कोतवाली के अंदर ‘जय श्रीराम...भारत माता की जय...ब्राह्मण एकता जिंदाबाद’ के नारे लगाए और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो...

किसान आंदोलन: श्रमण बनाम ब्राह्मण संस्कृति का टकराव

संघ-भाजपा गठजोड़ द्वारा कारपोरेट-पूंजपीतियों के हित में लाए गए नए कृषि कानून के खिलाफ किसान आंदोलन चरम पर है। वर्तमान समय में इस आंदोलन को कई नजरिए से व्याख्यायित किया जा रहा है। जिसमें उच्च जातीय-उच्च वर्गीय एवं परजीवी...

जयंती पर विशेष: रुढ़िवादी परंपराओं और दकियानूसी बेड़ियों को तोड़कर सावित्रीबाई ने रचा इतिहास

आज भारत की प्रथम महिला शिक्षिका राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले की 190 वीं जयंती हैं। 19वीं शताब्दी में उनके द्वारा किये गए साहसिक कार्यों को आज 21वीं सदी में भी जब हम देखते हैं, तो हमें आश्चर्य होता है, और...

ज्योतिराव फुले: आधुनिक युग में दलितों-बहुजनों, महिलाओं एवं किसानों के संघर्ष के पहले नायक

तुम कैसे बेशर्म हुए, वश में होकर इन ब्राह्मणों के नित छूने को चरण अरे तुम झुक जाते हो यों कैसे। आर्यों की मनुस्मृति को देखो, ध्यानपूर्वक देखो उसमें धोखा है सब देखो, पढ़ो ज़रा इनके ग्रंथों को।। - ज्योतिराव फुले “मेरे तीसरे गुरु...

पेरियार जयंती: सच्ची रामायण का विरोध धार्मिक से कहीं ज्यादा राजनीतिक है

(ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ (17 सितंबर, 1879—24 दिसंबर, 1973) बीसवीं शताब्दी के महानतम चिंतकों और विचारकों में से एक हैं। उन्हें वाल्तेयर की श्रेणी का दार्शनिक, चिंतक, लेखक और वक्ता माना जाता।‘  भारतीय समाज और भारतीय व्यक्ति का मुकम्मल...

26 जुलाई 1902 : भारतीय समाज का लोकतंत्रीकरण दिवस

26 जुलाई, 1902 को कोल्हापुर के शासक छत्रपति शाहू जी महाराज ने अपने कोल्हापुर राज्य की सरकारी नौकरियों में सभी सोपानों पर पिछड़े वर्ग (अर्थात ब्राह्मण, कायस्थ और पारसी को छोड़कर सभी समुदायों) के लिए 50 प्रतिशत पदों को...

आरएसएस और डॉ. आंबेडकर के विचारों में है 36 का रिश्ता

“अगर हिन्दूराज हकीकत बनता है, तब वह इस मुल्क के लिए सबसे बड़ा अभिशाप होगा। हिन्दू कुछ भी कहें, हिन्दूधर्म स्वतन्त्रता, समता और बन्धुता के लिए खतरा है।इन पैमानों पर वह लोकतन्त्र के साथ मेल नहीं खाता है।हिन्दूराज को...
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हर घर तिरंगा: कहीं राष्ट्रध्वज के भगवाकरण का अभियान तो नहीं?

आजादी के आन्दोलन में स्वशासन, भारतीयता और भारतवासियों की एकजुटता का प्रतीक रहा तिरंगा आजादी के बाद भारत की...
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