Friday, January 21, 2022

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दीपावली की सामाजिकता को तो नष्ट कर चुका है बाजार

पिछले दिनों राष्ट्र के नाम संबोधन में उत्सव प्रेमी प्रधानमंत्री ने फरमाया है कि देशवासी खूब धूमधाम से दीपावली मनाएं। उनका यह फरमान आम आदमी के जले पर नमक छिड़कने जैसा है। इसलिए कि बगैर सोची-समझी नोटबंदी और दिशाहीन...

बाजारवादी समाजवाद के बाद साझा समृद्धि: अब कैसे दिखेगा चीन?

चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की अगले महीने (8-11 नवंबर) एक विशेष बैठक होगी। खबरों के मुताबिक उसमें ‘इतिहास पर संकल्प-पत्र (resolution)’ को मंजूरी देगी। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि पार्टी के इतिहास में इस संकल्प-पत्र का वही...

कुछ चुनाव-रणनीतिकार अगर सीएम-पीएम बनाने लगें तो बचे-खुचे लोकतंत्र का क्या होगा?

नेताओं और दलों को 'चुनाव रणनीति' बताने और बनाने वालों के 'बाजार' के किसी 'कामयाब कारोबारी' को अगर ये भ्रम हो जाय कि नेता क्या, वह किसी को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री भी बना सकता है तो इसे आप क्या...

तीन विदेशी फंडों के खाते सीज, अडानी ग्रुप में किया है 43500 करोड़ का निवेश

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) ने अलबुला इनवेस्टमेंट फंड, क्रेस्टा फंड और एपीएमएस इनवेस्टमेंट फंड के अकाउंट्स फ्रीज कर दिए हैं। इन विदेशी फंड के पास अडानी ग्रुप की 4 कंपनियों के 43,500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर हैं। इस बीच बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम...

कृषि कानूनों के चाहे-अनचाहे नतीजे

पलासी की निर्णायक लड़ाई में, जिसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपने पैर जमा लिए और अपना शासन कायम कर लिया, हार लड़ाई के मैदान में नहीं, बल्कि एक सेनापति की दगाबाजी के कारण हुई। इसी तर्ज...

यह नग्न बाजारवाद का बेशर्म परीक्षण है!

इन दिनों वैसे तो अर्थव्यवस्था के क्षेत्र से आ रही लगभग सभी खबरें निराश करने वाली हैं, लेकिन सबसे बुरी खबर यह है कि आम आदमी को महंगाई से राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं। अनाज, दाल-दलहन, चीनी,...

आत्मनियमन के ढोंगियों ने ऐसे रोका मीडिया में बदलाव

बात पुरानी हो चुकी है, मगर अभी भी प्रासंगिक है और इस पर चर्चा करना बहुत ज़रूरी है। ज़रूरी इसलिए है कि बहुत से लोग या तो खुशफ़हमी में हैं या फिर वे जान-बूझकर यथास्थिति को बरक़रार रखना चाहते...

दैत्याकारी कॉरपोरेट के जबड़ों के हवाले किसान

कृषि सुधार के नाम पर तीन नए कानून 20 सितंबर, 2020 को राज्यसभा में पास घोषित कर दिये गए। इस बिल को कैसे आनन-फानन में बिना संसदीय औपचारिकताओं को पूरा किये पास कर दिया गया यह तो उस दिन की...

किसान, बाजार और संसदः इतिहास के सबक क्या हैं

जो इतिहास जानते हैं, जरूरी नहीं कि वे भविष्य के प्रति सचेत हों। लेकिन जो इतिहास जानते ही नहीं, वे बने बनाये रास्ते पर भी नहीं चल पाते। जो इतिहास के चेहरे पर झूठ का कचरा फेंकते रहते हैं,...

स्कूल और छात्र के बीच महज मध्यस्थ नहीं है अध्यापक

महामारी ने हमारी सामूहिक सोच को अव्यवस्थित कर दिया है। और यह मान लिया गया है कि दुनिया बिखर चुकी है। मैं खुद से एक जरूरी सवाल पूछता हूंः हम खुद को एक अध्यापक के बतौर कैसे परिभाषित करें?...
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47 लाख की आबादी वाले हरदोई में पुलिस ने 90 हजार लोगों को किया पाबंद

47 लाख (4,741,970) की आबादी वाले हरदोई जिले में 90 हजार लोगों को पुलिस ने पाबंद किया है। गौरतलब...
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