Tuesday, October 19, 2021

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कुछ चुनाव-रणनीतिकार अगर सीएम-पीएम बनाने लगें तो बचे-खुचे लोकतंत्र का क्या होगा?

नेताओं और दलों को 'चुनाव रणनीति' बताने और बनाने वालों के 'बाजार' के किसी 'कामयाब कारोबारी' को अगर ये भ्रम हो जाय कि नेता क्या, वह किसी को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री भी बना सकता है तो इसे आप क्या...

तीन विदेशी फंडों के खाते सीज, अडानी ग्रुप में किया है 43500 करोड़ का निवेश

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) ने अलबुला इनवेस्टमेंट फंड, क्रेस्टा फंड और एपीएमएस इनवेस्टमेंट फंड के अकाउंट्स फ्रीज कर दिए हैं। इन विदेशी फंड के पास अडानी ग्रुप की 4 कंपनियों के 43,500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर हैं। इस बीच बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम...

कृषि कानूनों के चाहे-अनचाहे नतीजे

पलासी की निर्णायक लड़ाई में, जिसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में अपने पैर जमा लिए और अपना शासन कायम कर लिया, हार लड़ाई के मैदान में नहीं, बल्कि एक सेनापति की दगाबाजी के कारण हुई। इसी तर्ज...

यह नग्न बाजारवाद का बेशर्म परीक्षण है!

इन दिनों वैसे तो अर्थव्यवस्था के क्षेत्र से आ रही लगभग सभी खबरें निराश करने वाली हैं, लेकिन सबसे बुरी खबर यह है कि आम आदमी को महंगाई से राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं। अनाज, दाल-दलहन, चीनी,...

आत्मनियमन के ढोंगियों ने ऐसे रोका मीडिया में बदलाव

बात पुरानी हो चुकी है, मगर अभी भी प्रासंगिक है और इस पर चर्चा करना बहुत ज़रूरी है। ज़रूरी इसलिए है कि बहुत से लोग या तो खुशफ़हमी में हैं या फिर वे जान-बूझकर यथास्थिति को बरक़रार रखना चाहते...

दैत्याकारी कॉरपोरेट के जबड़ों के हवाले किसान

कृषि सुधार के नाम पर तीन नए कानून 20 सितंबर, 2020 को राज्यसभा में पास घोषित कर दिये गए। इस बिल को कैसे आनन-फानन में बिना संसदीय औपचारिकताओं को पूरा किये पास कर दिया गया यह तो उस दिन की...

किसान, बाजार और संसदः इतिहास के सबक क्या हैं

जो इतिहास जानते हैं, जरूरी नहीं कि वे भविष्य के प्रति सचेत हों। लेकिन जो इतिहास जानते ही नहीं, वे बने बनाये रास्ते पर भी नहीं चल पाते। जो इतिहास के चेहरे पर झूठ का कचरा फेंकते रहते हैं,...

स्कूल और छात्र के बीच महज मध्यस्थ नहीं है अध्यापक

महामारी ने हमारी सामूहिक सोच को अव्यवस्थित कर दिया है। और यह मान लिया गया है कि दुनिया बिखर चुकी है। मैं खुद से एक जरूरी सवाल पूछता हूंः हम खुद को एक अध्यापक के बतौर कैसे परिभाषित करें?...

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से बातचीत में रघुराम राजन ने कहा- ग़रीबों की मदद के लिए तत्काल 65 हज़ार करोड़ की जरूरत

(कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। कोरोना मसले पर वह कभी केंद्र सरकार को सुझाव देते दिखते हैं तो कभी उसकी आलोचना। 13 फ़रवरी को ट्वीट कर उन्होंने बहुत पहले ही...

बाजार लाचार, समाज बेहाल, वापस सरकार

इस सदी में तीसरी बार बाजार ने घुटने टेके हैं और सरकारों की वापसी हुई है। पहली बार सरकारों की वापसी तब हुई थी जब 11 सितंबर 2001 को न्यूयार्क के वर्ल्ड ट्रेड टावर पर आतंकी हमला हुआ था।...
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झारखंड में भी बेहद असरदार रहा देशव्यापी रेल रोको आंदोलन

18 अक्टूबर 2021 को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा पूर्व घोषित देशव्यापी रेल रोको कार्यक्रम के तहत रांची में किसान...
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