Saturday, October 23, 2021

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जयंती पर विशेष: प्रेमचंद की परम्परा एक सामूहिक प्रगतिशील परम्परा थी

जिस प्रेमचन्द के निधन पर उनके मुहल्ले के लोगों ने कहा कि कोई मास्टर था जो मर गया, जिस प्रेमचन्द की  अत्येंष्टि  में दस बारह लोग ही मुश्किल से शामिल हुए थे, वह प्रेमचन्द अपने निधन के 85 साल...

डॉ.कमला प्रसाद: प्रगतिशील आंदोलन का अनथक योद्धा

सज्जाद जहीर और भीष्म साहनी के बाद प्रगतिशील लेखक संघ को एक नई दिशा व ऊर्जा देने वाले डॉ. कमला प्रसाद पांडेय समूची साहित्यिक बिरादरी में अद्भुत सांगठनिक क्षमता और नेतृत्वशीलता के लिए जाने-पहचाने जाते थे। अपनी जिन्दगी के...

हमारे जिया भाई: इतिहास का एक अहम दौर जिनकी आंखों से होकर गुजरा!

इलाहाबाद के प्रगतिशील राजनीति और साहित्य से जुड़ा हर व्यक्ति जिया भाई को जानता ही जानता है, वे इन दोनों ही क्षेत्रों में शहर के ‘आदिपुरुष’ थे। इस कारण 1997-98 से राजनीति में सक्रियता शुरू होने के साथ ही...

पुण्यतिथि पर विशेष: बेहद उदात्त शख्सियत के मालिक थे मुंशी प्रेमचंद

प्रेमचन्द के जीवन और व्यक्तित्व के बारे में जो भी तथ्य मिलते हैं उनसे अन्ततोगत्वा इसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है कि वे एस असाधारण साधारण इन्सान थे। शायद उनके व्यक्तित्व की इसी खूबी ने उन्हें आम-फहम नजर...

सज्जाद ज़हीर : तरक्की पसंद तहरीक की जिंदा रूह

हिंदुस्तानी अदब में सज्जाद जहीर की शिनाख्त, तरक्की पसंद तहरीक के रूहे रवां के तौर पर है। वे राइटर, जर्नलिस्ट, एडिटर और फ्रीडम फाइटर भी थे। साल 1935 में अपने चंद तरक्कीपसंद दोस्तों के साथ लंदन में प्रगतिशील लेखक...

पुनरुत्थान की बेला में परसाई को भूल गए प्रगतिशील!

हिन्दी की दुनिया में प्रचलित परिचय के लिहाज से हरिशंकर परसाई सबसे बड़े व्यंग्यकार हैं। इसमें कोई झूठ नहीं है पर सिर्फ़ इतना परिचय उनकी उस भूमिका को नज़रअंदाज़ करने वाली बात है जिसको याद करना आज और ज़्यादा...

दुआ और पटेल मामला: प्रगतिशील लेखक संघ ने कहा- आजाद आवाजों को दबाने की हरकतों से बाज आए सरकार

पंजाब/ नई दिल्ली। प्रगतिशील लेखक संघ ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ और आकार पटेल के खिलाफ केस दर्ज करने की सख्त निंदा की है और फौरन यह मामला रद्द करने की मांग रखी...

ख्वाजा अहमद अब्बास : समाजवाद जिनके जीने का सहारा था

ख्वाजा अहमद अब्बास मुल्क के उन गिने चुने लेखकों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने लेखन से पूरी दुनिया को मुहब्बत, अमन और इंसानियत का पैगाम दिया। अब्बास ने न सिर्फ फिल्मों, बल्कि पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में भी...

शाहू महाराज : एक राजा जिसकी सामाजिक प्रतिबद्धता प्रगतिशीलों से ज़्यादा थी

कोल्हापुर के शाहू महाराज (26 जुलाई 1874 – 6 मई 1922) को छत्रपति और राजर्षि भी कहा जाता है। यह यक़ीन करना बेहद मुश्किल है कि ऐसा कोई राजा या सामंत सचमुच था जिसकी सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता उस दौर...

726 बुद्धिजीवियों का खुला पत्र, कैब को बताया संविधान की मूल भावना के खिलाफ

एक बार फिर देश के 726 प्रगतिशील बुद्धिजीवियों (कलाकारों, शिक्षाविदों, नाटककारों) ने भारतीय सत्ता को एक पत्र लिख कर चेताया है कि उसके द्वारा नागरिकता संशोधन बिल (कैब) जो अब कानून बन चुका है, भारतीय संविधान की मूल भावना...
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पंचायत चुनाव को प्रभावित करने के नजरिये से मोरियावा में पुलिस ने किया तांडव: माले

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने पटना जिले के धनरूआ प्रखंड के मोरियावा में पुलिस द्वारा किए गए तांडव की...
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