हमारी सभ्यता अपनी कालगणना में जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का विमर्श… Read More
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हमारे समाज और साहित्य में समता और सामाजिक न्याय के विचारों और मूल्यों की मौजूदगी काफी पहले… Read More
सम्+आज = समाज! समाज स्वयं को सार्वकालिक स्वरूप में देखता है। सम का अर्थ है समान और… Read More
नई दिल्ली। गाजियाबाद स्थित क्रासिंग रिपब्लिक सोसाइटी में एक उर्दू अध्यापक को जयश्रीराम का नारा लगाने के… Read More
अब जब चंद्रयान-3 भी दर्ज हो चुका है हमारे देश में, तो क्या हम “मेहतर मिष्ठान भंडार… Read More
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें एक युवक को कुछ लोग पकड़े हुए… Read More
साहित्य, समाज और जनतंत्र के संबंधों के विभिन्न स्तर और आयाम का अवधाराणात्मक अध्ययन और मानव संबंध… Read More
“मेरी शादी 30 साल पहले हुई थी। शादी के कुछ दिन तो अच्छे रहे लेकिन उसके बाद… Read More
नीतीश कुमार भारतीय जनता पार्टी के साथ अ-सहज हो गये थे। उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का… Read More
किसी भी देश में जो मौजूदा समाज व्यवस्था होती है उसी जड़ें वहां के धर्म और संस्कृति… Read More