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‘उफ़! टू मच डेमोक्रेसी’: सादा ज़बान में विरोधाभासों से निकलता व्यंग्य

डॉ. द्रोण कुमार शर्मा का व्यंग्य-संग्रह ‘उफ़! टू मच डेमोक्रेसी’ गुलमोहर किताब से प्रकाशित हुआ है। वैसे तो ये… Read More

बेहतर जनमत निर्माण के जरिये ही तैयार हो सकता है उम्दा नेतृत्व

लोकतंत्र एक गतिशील अवधारणा है। इसलिए सामाजिक, आर्थिक सांस्कृतिक और अन्य परिवर्तनों के अनुरूप लोकतंत्र का स्वरूप… Read More

व्यवसायिक हित स्वतंत्र पत्रकारिता पर हावी, लोकतंत्र से समझौता:चीफ जस्टिस

चीफ जस्टिस एनवी रमना ने मीडिया पर व्यापारिक घरानों के वर्चस्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब… Read More

न्यायाधीश सामाजिक वास्तविकताओं से आंखें नहीं मूंद सकते:चीफ जस्टिस

चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा है कि वर्तमान समय की न्यायपालिका के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों… Read More