Sunday, October 17, 2021

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डॉ.लोहिया की पुस्तक ‘एक्शन इन गोवा’ के हिंदी, मराठी और कोंकणी वर्जन का लोकार्पण

डॉ. राममनोहर लोहिया की 54 वीं पुण्यतिथि पर उनकी लिखी पुस्तक एक्शन इन गोवा का हिन्दी के साथ ही कोंकणी और मराठी में हुए अनुवाद का गोवा और हैदराबाद में लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक हिन्दी अनुवाद के लिए...

भाषा की गुलामी खत्म किये बिना वास्तविक आज़ादी संभव नहीं

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के लिए आज़ादी का सवाल केवल अंग्रेजों से देश को मुक्त कराना भर नहीं था बल्कि उनके लिए आज़ादी व्यक्ति और समाज की मुक्ति का भी प्रश्न था। यह मुक्ति अपनी भाषा में ही संभव थी...

हिंदी के बेडौल अपराध साहित्य की एक नजीर- ‘पिशाच’

पिछली 29 अगस्त को वीडियो पत्रकार अजित अंजुम ने अपने यूपी चुनाव और किसान आंदोलन संबंधी कवरेज के बीच अचानक ही हिंदी के हाल में प्रकाशित एक ‘क्राइम थ्रिलर’ ‘पिशाच’ पर चर्चा की। इसके लेखक संदीप पालीवाल के साथ...

सांप्रदायिकता और आभिजात्यता में फंसी है हिंदी

रोते-धोते हिंदी दिवस गुजर गया। लोगों ने जमकर अंग्रेजी को गलियां दी और इसके दबदबे का रोना रोया। वैसे, भाषाएं उस अर्थ में मरती नहीं हैं जिस अर्थ में प्राणी मरते हैं। वे गायब जरूर हो जाती हैं। लेकिन...

लगातार पांव पसार रही है हिंदी

संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया। इसी की स्मृति में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। आधुनिक हिंदी की बात की जाए तो इस पर महावीर प्रसाद द्विवेदी का...

संघर्षों और बलिदानों से भरा पड़ा है हिंदी पत्रकारिता का इतिहास

1826 की 30 मई को कोलकाता की आमड़ातल्ला गली से प्रकाशित अल्पजीवी हिंदी पत्र उदन्त मार्तण्ड ने इतिहास रचा था। यह साप्ताहिक पत्र था। पत्र की भाषा पछाँही हिंदी थी, जिसे पत्र के संपादकों ने “मध्यदेशीय भाषा” कहा था।...

हिन्दी की रात की सुबह कब होगी?

भाषा की गुलामी बाकी तमाम गुलामियों में सबसे बड़ी होती है। दुनिया में जो भी देश परतंत्रता से मुक्त हुए हैं, उन्होंने सबसे पहला काम अपने सिर से भाषाई गुलामी के गट्ठर को उतार फेंकने का किया है। यह...

बहस में खुल गयी आरएसएस की कलई

‘सत्य हिंद’ वेब पोर्टल पर ‘आशुतोष की बात’ कार्यक्रम में दो दिन पहले की एक लगभग डेढ़ घंटा की चर्चा को सुना जिसका शीर्षक था— ‘हिंदुत्व पर बहस से डरना क्यों’। संदर्भ था ‘विश्व हिंदुत्व को ध्वस्त करने’ के...

जय श्रीराम; अभिवादन को युद्धघोष बनाने के पीछे आखिर क्या है मकसद?

पिछले पखवाड़े न दशहरा था न रामनवमी मगर पूरी हिंदी पट्टी में जय श्रीराम के ललकारों की बहार सी आयी पड़ी थी। कानपुर से इंदौर तक, उज्जैन से देवास होते हुए दूर पहाड़ों से लेकर बिहार के गंगा मैदान...

हिंदी पट्टी की विद्रूपताओं को खोल कर रख देती है ‘गाजीपुर में क्रिस्टोफर कॉडवेल’

सबसे पहले उर्मिलेश सर आपको इस बात के लिए शुक्रिया कि आपके चलते मैंने कोई किताब पढ़ी। पिछले चार सालों से पोर्टल की व्यस्तता के चलते न तो अलग से समय निकाल सका और न ही इसके लिए कोई...
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700 शहादतें एक हत्या की आड़ में धूमिल नहीं हो सकतीं

11 महीने पुराने किसान आंदोलन जिसको 700 शहादतों द्वारा सींचा गया व लाखों किसानों के खून-पसीने के निवेश को...
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