Friday, April 19, 2024

प्रफुल्ल कोलख्यान

लोकतंत्र में शासक बदलते रहते हैं लोकतंत्र नहीं बदलता

परिवर्तन प्रकृति का अपरिवर्तनीय नियम है। संसार में बदलाव की प्रक्रिया जारी रहती है। इस बदलाव के अपने नियम हैं। हर बदलाव में मूल तत्व बना रहता है। बुनियाद नहीं बदलती है। जैसे, मनुष्य बदलता रहता है। मनुष्यता नहीं...

‎‎‘एक सूत्रीय भारतबोध’ के कुत्सित इरादों के विरुद्ध ‘सामासिक भारतबोध’‎ के आग्रह ‎और अपील

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के द्वारा गिरफ्तार कर लिये जाने के बाद सिर्फ आम आदमी पार्टी के नेता नहीं रह गये हैं। चुनाव के माहौल में संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग ने सतरू...

आम चुनाव कैसा होगा और इससे भारत के कष्टों का ‎उपचार कैसे होगा ?

भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के ‎अनुपालन में ‎हलफनामा के रूप में बताया है कि भारतीय स्टेट बैंक ने सुप्रीम कोर्ट के ‎आदेशानुसार चुनावी चंदा (Electoral Bonds) से संबंधित सभी विवरण...

रगों में बहनेवाले खून के पानी बन जाने से पहले, ‎ इस तालाब का पानी ‎बदलना जरूरी है ‎

आम चुनाव 2024 भारत के सामने है। चुनाव यानी लोकतंत्र का सब से बड़ा पर्व। भारत के लोकतंत्र की आंख में लहरा रहा है, सपनों का सागर। सपने अतीत के भी। सपने वर्तमान के भी। सपने भविष्य के भी।...

सांगठनिक अनुपस्थिति के बावजूद वाम विचार में ही विपक्ष का प्राण है

आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) ‎लागू है। देखना दिलचस्प होगा कहां-कहां, कौन-कौन, कितना-कितना और कैसे-कैसे इसका उल्लंघन करते हैं। चुनाव आयोग क्या-क्या कदम उठाता है। बहरहाल, विज्ञापन, प्रचार, सूचना, प्रस्ताव, वायदा, करार, घोषणा, संकल्प पत्र जैसे पवित्र...

लोकतंत्र शक्ति के दंभ या दंभ की शक्ति पर नहीं, सहयोग की संभावना पर जिंदा रहता है

आज-कल भारत में शक्ति की बहुत चर्चा है। सामने आम चुनाव है। लोकतंत्र में चुनाव शक्ति संयोजन का अवसर होता है। चुनावी राजनीति में इतनी हलचल के पीछे शक्ति का ही तो खेल होता है। सभी राजनीतिक दल बढ़-चढ़कर...

विराटता की उद्दंडता के विरुद्ध मनुष्य की लघुता की सहकारी ‎और समवायी ‎विनम्रता की स्वतंत्रता का उपकरण है लोकतंत्र

विचारधारा का सवाल सभ्यता पर विचार करने वाले के मन में कभी-न-कभी जरूर उठता है। यह मानने में कठिनाई हो सकती है कि विचारधारा का अपना अस्तित्व होता है और उसे व्यक्ति की निरपेक्षता में रहकर समझा जा सकता...

‘मिथ और रियलटी’ की लड़ाई में ‘फेक और फेवरेबल’ का मुकाबला सत्ता के भ्रमास्त्र से है

अब चुनाव की घोषणा हो चुकी है। आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। 2024 का आम चुनाव कई मामलों में ऐतिहासिक होगा। जितनी मुस्तैदी और दृढ़ता से चुनाव आयोग ने प्रेस वार्ता में आदर्श आचार संहिता की बात...

स्त्री-पुरुष-दोनों को है एक घर की तलाश

स्त्री की वर्तमान दशा पर तरह-तरह की चिंता की जा रही है। मुसीबत यह है कि चिंता का क्षेत्र बौद्धिक जगत के दायरे से बाहर नहीं निकल पा रहा है। सामाजिक अत्याचार के खिलाफ सामाजिक संवेदनशीलता में भारी गिरावट...

लोकतांत्रिक राजनीति के ‘दुष्टीकरण’ और ‎‘लुच्चीकरण’ की ‎‎‘राजतांत्रिक राजनीति’ की फांस

भारत इन दिनों विश्वास और अभ्यास के सवाल से जूझ रहा है। चतुर्दिक टकराव से घिर रहा है। रोजी-रोजगार के लिए टुकुर-टुकुर ताकते लोग टकराव के टंकार से दुखी हैं। तरह-तरह के चक्र घूम रहे हैं। एक ऐसा क्रम...

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जौनपुर में आचार संहिता का मजाक उड़ाता ‘महामानव’ का होर्डिंग

भारत में लोकसभा चुनाव के ऐलान के बाद विवाद उठ रहा है कि क्या देश में दोहरे मानदंड अपनाये जा रहे हैं, खासकर जौनपुर के एक होर्डिंग को लेकर, जिसमें पीएम मोदी की तस्वीर है। सोशल मीडिया और स्थानीय पत्रकारों ने इसे चुनाव आयोग और सरकार को चुनौती के रूप में उठाया है।