संस्कृति-समाज

स्‍मृति विशेष : सामाजिक न्‍याय और संविधान को बचाने लिए आजीवन लड़ते रहे चौथीराम यादव

हिंदी साहित्‍य जगत के वरिष्‍ठ मार्क्‍सवादी विचारक, आलोचक और अंबेडकरी विचारधारा के समर्थक प्रोफेसर चौथीराम यादव का… Read More

प्रो.चौथीराम यादवः मौन हो गया खांटी बनारसी अंदाज वाली साहसी आलोचना का सबसे भरोसेमंद स्वर

बनारस। बात-बात पर छोटी-बड़ी लड़ाइयों में, असहमित के पक्ष में, किसी भी सत्ता के खिलाफ, नफा-नुकसान की… Read More

पूर्वाग्रहों से इतिहास और विध्वंस से पुरातत्व का निर्माण नहीं होता

इतिहास कोई सीधी रेखा नहीं होती और इसीलिए वह कालक्रमों में लिखे होने के बावजूद अपने भीतर… Read More

मजनूं गोरखपुरी की शख़्सियत एक संस्था की हैसियत रखती थी 

मजनूं गोरखपुरी की शख़्सियत एक संस्था की हैसियत रखती थी तरक़्क़ीपसंद तहरीक में मजनूं गोरखपुरी का नाम बड़े… Read More

एक प्रोफेसर की डायरीः शिक्षा व्यवस्था की सीमाओं और उसकी क्रूरताओं को दर्ज करती किताब

शिक्षा पर रबीन्द्रनाथ टैगोर की एक प्रसिद्ध उक्ति हैः ‘सर्वोत्तम शिक्षा वही है जो संपूर्ण सृष्टि से… Read More

पुस्तक समीक्षा: लोक शाहीर अण्णा भाऊ साठे की संघर्षमय ज़िंदगी और अदबी कारनामे

अण्णा भाऊ साठे की पहचान एक लोक शाहीर की है। जिन्होंने ‘स्टालिनग्राड’ ‘तेलंगणा’ जैसे जोशीले पंवाड़े और… Read More

लोकतंत्रः जाति के लिए, जाति के द्वारा और जाति का

अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने उन्नीसवीं सदी में लोकतंत्र को परिभाषित करते हुए कहा था, “लोकतंत्र का… Read More