“मैंने उसको जब-जब देखा, लोहा देखा, लोहे जैसा- तपते देखा- गलते देखा- ढलते देखा, मैंने उसको गोली… Read More
संस्कृति-समाज
भारतीय सिनेमा में मृणाल सेन एक ऐसे निर्देशक हुए हैं, जिन्होंने अपनी प्रयोगशील और समाजी-सियासी तौर पर… Read More
बीती 12 मई की शाम प्रो. चौथीराम यादव का अकस्मात निधन हिंदी के बौद्धिक व परिवर्तनकामी समाज… Read More
हिंदी साहित्य जगत के वरिष्ठ मार्क्सवादी विचारक, आलोचक और अंबेडकरी विचारधारा के समर्थक प्रोफेसर चौथीराम यादव का… Read More
बनारस। बात-बात पर छोटी-बड़ी लड़ाइयों में, असहमित के पक्ष में, किसी भी सत्ता के खिलाफ, नफा-नुकसान की… Read More
इतिहास कोई सीधी रेखा नहीं होती और इसीलिए वह कालक्रमों में लिखे होने के बावजूद अपने भीतर… Read More
हिन्दी के आज के संकट को समझने के लिए आलोक राय की किताब ‘हिन्दी राष्ट्रवाद’ एक बहुत… Read More
मजनूं गोरखपुरी की शख़्सियत एक संस्था की हैसियत रखती थी तरक़्क़ीपसंद तहरीक में मजनूं गोरखपुरी का नाम बड़े… Read More
शिक्षा पर रबीन्द्रनाथ टैगोर की एक प्रसिद्ध उक्ति हैः ‘सर्वोत्तम शिक्षा वही है जो संपूर्ण सृष्टि से… Read More
(नवारुण प्रकाशन से हाल ही में प्रकाशित वरिष्ठ पत्रकार हरजिंदर की किताब ‘चुनाव के छल -प्रपंच- मतदाताओं… Read More