Wednesday, October 27, 2021

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माफीनामों के वीर हैं सावरकर

सावरकर सन् 1911 से लेकर सन् 1923 तक अंग्रेज़ों से माफी मांगते रहे, उन्होंने छः माफीनामे लिखे और सन् 1923 के बाद वह लगातार ही इस देश की जनता को बांटने की बात करते रहे। नफरत और हिंसा की...

द्विराष्ट्र के सिद्धांत के जनक कौन- जिन्ना या सावरकर?

पिछले तीन चार वर्ष से वी डी सावरकर को प्रखर राष्ट्रवादी सिद्ध करने का एक अघोषित अभियान कतिपय इतिहासकारों द्वारा अकादमिक स्तर पर अघोषित रूप से चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी सावरकर को महिमामण्डित करने वाली...

पेगासस गेट: घटती आजादी, सिमटता लोकतंत्र

पेगासस जासूसी मामला अप्रत्याशित नहीं है। सरकारों का (और विशेष रूप से हमारी वर्तमान सरकार का) यह स्वभाव रहा है कि वे अपनी रक्षा को देश की सुरक्षा के पर्यायवाची के रूप में प्रस्तुत करती हैं। स्वयं पर आए...

हिंदुत्व के मठ में राजा सुहेलदेव का पाठ

(यूपी में बीजेपी केवल सत्ता नहीं चला रही है। बल्कि वह धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर भी सक्रिय है। बात यहीं तक सीमित रहती तो भी कोई बात नहीं थी बल्कि अपने आधार को बढ़ाने तथा भविष्य में...

परिनिर्वाण दिवस पर विशेष: हिंदुत्व, हिंदू राष्ट्र और डॉ. अंबेडकर

90 के दशक के शुरुआत से ही संघ के नेतृत्व में हिंदुत्ववादी शक्तियां  अपनी राजनैतिक परियोजना के हिसाब से डॉ. अंबेडकर का पुनर्पाठ करने में लगी थीं। अंबेडकर को हिन्दू राष्ट्र का समर्थक, आरएसएस का शुभचिंतक और पाकिस्तान विरोधी...

सोनिया गांधी ने लिखा बाइडेन और कमला को पत्र, कहा- उम्मीद है अपने राष्ट्र के जख्मों को भरने में आप दोनों कामयाब होंगे

(कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन और उप राष्ट्रपति कमला हैरिस को पत्र लिखकर उनकी जीत की बधाई दी है। कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा लिखा गया यह पत्र नीचे दिया जा रहा है।-संपादक) प्रिय श्री बाइडेन, संयुक्त...

महामारी के बीच स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्र के स्वास्थ्य पर प्रधानमंत्री के नये ऐलान का मतलब

भारत के स्वतंत्र देश बनने के बाद पहली बार हमने अपना स्वतंत्रता दिवस एक भयावह महामारी के बीच मनाया। ऐसी महामारी बीते 73 वर्षों में कभी नहीं आई। अनेक देशवासियों को लग रहा था कि प्रधानमंत्री इस महामारी से...

इतिहास के सर्वाधिक पतनशील दौर में है भारतीय अभिजनों की राजनीति

(झूठ, फरेब, पाखंड, घृणा, नफरत, लालच, दंभ और अहंकार आदि अनादि नकारात्मक प्रवृत्तियों के मिलने से ही किसी फासीवादी जमात के चरित्र का निर्माण होता है। उसकी बुनियादी पहचान भी यही होती है कि वह जैसी दिखती है वैसी...

आरएसएस और डॉ. आंबेडकर के विचारों में है 36 का रिश्ता

“अगर हिन्दूराज हकीकत बनता है, तब वह इस मुल्क के लिए सबसे बड़ा अभिशाप होगा। हिन्दू कुछ भी कहें, हिन्दूधर्म स्वतन्त्रता, समता और बन्धुता के लिए खतरा है।इन पैमानों पर वह लोकतन्त्र के साथ मेल नहीं खाता है।हिन्दूराज को...

चायना को छोड़ चना पर जोर, मोदी जी माजरा क्या है!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले। पर, क्या वाकई बोले? नहीं, वो नहीं बोले। पर, क्या वाकई नहीं बोले? नहीं, नहीं, वो बोले तो। मगर, जो बोले उसके लिए ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’! कृषि विभाग के मंत्री बोल सकते थे, गृहमंत्री...
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हाय रे, देश तुम कब सुधरोगे!

आज़ादी के 74 साल बाद भी अंग्रेजों द्वारा डाली गई फूट की राजनीति का बीज हमारे भीतर अंखुआता -अंकुरित...
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